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9 दिनों के लंबे इंतजार के बाद आरक्षक डोलनारायण पर FIR दर्ज, कलेक्टर के निर्देश के बाद हरकत में आई कोतरा रोड पुलिस, कसा कानूनी शिकंजा!

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रायगढ़। न्याय की गुहार जब प्रशासनिक संवेदनशीलता से जुड़ती है, तो आम जनता का विश्वास तंत्र पर और मजबूत हो जाता है। कोतरा रोड थाना क्षेत्र के ग्राम कुरमापाली में एक आरक्षक और ग्रामीण के बीच हुए विवाद के मामले में अब न्याय की राह प्रशस्त हुई है। पुसौर थाने में पदस्थ आरक्षक डोलनारायण साव द्वारा की गई कथित मारपीट के मामले में बीते कुछ दिनों से जांच की प्रक्रिया चल रही थी। मामला जब कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के संज्ञान में आया, तो उनके निर्देश पर आज कोतरा रोड पुलिस ने आरक्षक के विरुद्ध विधिवत अपराध पंजीबद्ध कर लिया है।

जाने पूरा मामला

पीड़ित के अनुसार घटना 13 अप्रैल की रात की है। प्रार्थी बद्रीका साहू ने अपनी शिकायत में अपनी व्यथा बताते हुए कहा कि वह अपने घर के सामने शांति से बैठे थे, तभी आरक्षक डोलनारायण अपने साथियों विवेकानंद साहू, भरतलाल साहू, संतोष साव, तेनाली साव और भगलू साव के साथ वहां पहुँचा। बिना किसी कारण के मां-बहन की अत्यंत गंदी और भद्दी गालियां देने लगा। जब बद्रीका साहू ने विरोध किया, तो आरक्षक ने मानवता को ताक पर रखकर अपनी वर्दी का रौब दिखाया और डंडे से उनकी कमर पर ताबड़तोड़ 5 से 6 बार वार किए। प्रार्थी रोता रहा, गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन आरक्षक का दिल नहीं पसीजा। उसने चिल्लाते हुए धमकी दी – “मैं पुलिस वाला हूं, मेरी पत्नी सरपंच है, मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तुझे और तेरे बेटे को झूठे केस में फंसाकर जेल भेज दूंगा। व्यथा यहीं खत्म नहीं हुई। जब बद्रीका साहू की पत्नी विशाखा साहू और बेटी वेदकुमारी उन्हें बचाने दौड़ीं, तो आरक्षक ने उनके साथ भी धक्का-मुक्की की और सार्वजनिक रूप से उन्हें अपमानित किया। प्रार्थी का कहना है कि एक लोक सेवक होकर आरक्षक ने ‘निर्मम अपराधी’ जैसा व्यवहार किया, जिससे उनका पूरा परिवार आज भी दहशत में है।

आरक्षक को सस्पेंड करने की उठी मांग
ग्रामीणों ने बताया कि FIR दर्ज होने के बाद अब आरक्षक डोलनारायण साव को सेवा से तत्काल निलंबित करने की मांग की है। ग्रामीणों का तर्क है कि आरोपी आरक्षक पुलिस विभाग का हिस्सा है, ऐसे में पद पर रहते हुए वह जांच प्रक्रिया को प्रभावित या हस्तक्षेप कर सकता है। ग्रामीणों ने जिला पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए आरक्षक को पद से पृथक रखा जाए, ताकि गवाहों और साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की गुंजाइश न रहे।

इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
कोतरा रोड पुलिस ने आरोपी आरक्षक डोलनारायण साहू के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 296, 351(3) और 115(2) के तहत केस दर्ज किया है। हालांकि, आरक्षक पर मामला दर्ज होना पीड़ित की पहली जीत है।

बोर तोड़ने का मामला अब भी अधर में
गौरतलब है कि आरक्षक पर मारपीट के साथ-साथ शासकीय संपत्ति (बोर) को नुकसान पहुँचाने का भी गंभीर आरोप है। ग्रामीणों ने वीडियो साक्ष्यों के साथ शिकायत की थी कि आरक्षक ने नशे की हालत में सरकारी बोर तोड़कर गांव की प्यास रोक दी थी। फिलहाल पुलिस ने केवल मारपीट के मामले में FIR की है, जबकि सरकारी बोर तोड़ने की शिकायत पर अभी जांच जारी होने की बात कही जा रही है।

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