रायगढ़ (केलो प्रवाह)। दानवीर सेठ किरोड़ीमल लहरिवाला ने अपनी संपत्तियां आजीवन जनहित में उपयोग करने के लिए चैरिटेबल ट्रस्ट की नींव रखी। बाद में ट्रस्ट को कब्जे में कर मुट्ठी भर लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए उपयोग शुरू किया। जब कोई विरोध, कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने संपत्तियां बेचनी शुरू कर दीं। अब ग्राम कोकड़ीतराई के ग्रामीणों की शिकायत पर कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए हैं। 10 सितंबर को जांच शुरू होने जा रही है। सेठ किरोड़ीमल चैरिटेबल ट्रस्ट की संपत्तियों पर कुंडली मारकर बैठे लोगों की कुर्सी अब डगमगाने लगी है।
अब तक हर बार सांठगांठ करके अपने कारनामे छिपाने में माहिर ये मठाधीश इस बार किसका सहारा लेंगे। कोकड़ीतराई के निरंजन साहू व अन्य ने छग शासन से शिकायत की थी। उनका कहना है कि ग्रामीणों ने पूर्व में अस्पताल, स्कूल, कॉलेज आदि निर्माण के लिए जमीन सेठ किरोड़ीमल धर्मादा ट्रस्ट को दान में दी थी। लेकिन ट्रस्टियों ने सार्वजनिक हितों के लिए काम करने के बजाय जमीन को अवैध कमाई का जरिया बना लिया।
ट्रस्ट की जमीन को निजी लाभ के लिए बेचने का आरोप
ट्रस्टियों ने जमीन को निजी लाभ के लिए बेच दिया है। बिना किसी रजिस्ट्री के बाहरी लोगों को जमीन दी जा रही है और बदले में मुंहमांगी रकम ली जा रही है।ट्रस्ट की 70 एकड़ जमीन पर बाहरी लोगों ने मकान और दुकान तक बना लिए हैं। ट्रस्ट की रखवाली के लिए नियुक्त चौकीदार महेश शर्मा और उनके पुत्र मनीष शर्मा पर भी जमीन बेचकर मकान व दुकान बनाने का आरोप लगाया गया है। छग शासन को की गई शिकायत के बाद कलेक्टर रायगढ़ को जांच करने का आदेश दिया गया था। कलेक्टर ने एसडीएम अरप टोप्पो, निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय, वरिष्ठ कोषालय अधिकारी चंद्रपाल सिंह ठाकुर और नायब तहसीलदार हरनंदन बंजारे की टीम बनाकर विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए थे। कलेक्टर के आदेश पर ट्रस्ट की संपत्ति के दस्तावेज एकत्र किए गए हैं। 10 सितंबर को जांच टीम मौके पर जा सकती है। नापजोख कर देखा जाएगा कि ट्रस्ट की संपत्ति को क्या किया गया है।
एक-एक कर खुलेगी सबकी फाइल
कलेक्टर ने जांच टीम को बिंदुवार विस्तृत जांच करने को कहा है। समिति को ट्रस्ट को मिली दान की भूमि का सीमांकन कर अतिक्रमण का पूरा विवरण देना होगा। चौकीदार की सीलियत की भी जांच की जाएगी। ट्रस्टियों की मिलीभगत की भी जांच की जाएगी। ट्रस्ट की समस्त चल व अचल संपत्तियों की सूची तैयार करने को कहा गया है। समिति से यह अभिमत भी मांगा गया है कि क्या शासन को ट्रस्ट का अधिग्रहण कर संपत्तियों को राजसात करना जरूरी है। न्यास की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने, बिना लिखा-पढ़ी के संपत्तियां बेचने और ट्रस्ट के उद्देश्यों को विफल करने वाले दोषियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी।























