सक्ती। सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में बॉयलर ब्लास्ट ने 19 जिंदगियां छीन लीं। इस हादसे के बाद परिजन अपनों की तलाश में भटकते रहे। रात करीब 3 बजे तक सक्ती और रायगढ़ के 5 अस्पतालों के चक्कर काटते रहे। उनकी आंखों में मायूसी, चेहरे पर थकान और दिल में बस एक ही सवाल था, कि आखिर मेरा भाई कहां है? जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा ब्लॉक के हरदी विशाल गांव के रहने वाले सनी कुमार अनंत, वेदांता प्लांट के बॉयलर ब्लास्ट के बाद से अपने भाई की तलाश में दर-दर भटकते रहे। घटना के 20 घंटे बाद भी कई परिवारों को अपने परिजनों की कोई जानकारी नहीं मिल पाई थी, जिससे वे परेशान होते रहे। हालांकि सुबह सनी के भाई रामेश्वर महिलांगे की मौत की खबर मिली, दोपहर को मृतकों की लिस्ट जारी हुई।
सनी ने बताया कि शाम 4 बजे से हम अपने भाई को ढूंढते रहे…रात के 3:30 बज गए थे। 5-6 अस्पताल गए, आईसीयू तक जाकर देखा, लेकिन कहीं भी उसका नाम नहीं मिला। उनके भाई रामेश्वर महिलांगे (उम्र 28-29 साल) वेदांता प्लांट में बॉयलर ऑपरेटर था। उसकी शादी हो चुकी है और एक छोटा बच्चा भी है। सनी ने बताया कि हादसे से एक दिन पहले ही भाई से बात हुई थी, रोज की तरह हाल-चाल पूछा था। लेकिन हादसे वाले दिन उससे बात नहीं हो पाई। जब फोन लगाया तो उसका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा था। फिर उसके दोस्तों का फोन आया कि प्लांट में बड़ा हादसा हुआ है…तब से हम बस उसे ढूंढ रहे हैं। सनी ने कहा कि हम प्लांट भी गए थे, लेकिन गेट पर ताला लगा हुआ था। बाहर बहुत भीड़ थी, लेकिन प्रबंधन से कोई बात करने नहीं आया। कोई कुछ बताने को तैयार नहीं था।
भूखे-प्यासे भटकते रहे
सनी ने दर्द भरी आवाज में कहा कि, हम पिछले 12 घंटे से भूखे-प्यासे थे…न रुकने की कोई व्यवस्था थी, न कोई सही जानकारी। बस अस्पतालों के चक्कर काट रहे थे। समझ नहीं आ रहा था भाई कहां है।


सुबह मिली मौत की खबर, दोपहर को लिस्ट आई
सनी ने बताया कि हमें जानकारी मिली थी की जिंदल अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज हैं लेकिन जब हम यहां पहुंचे तो हमें अस्पताल में सुबह आने को कहा जा रहा था लेकिन लगातार रिक्वेस्ट करने के बाद हमें आईसीयू में जाने की अनुमति मिली। हमने अंदर जाकर देखा तो भाई नहीं मिला, लेकिन अंदर भर्ती हुए लोग बुरी तरह से घायल हैं। सबके चेहरों में पट्टी बंधी है, सभी बुरी तरह से झुलस गए हैं। हालांकि बुधवार सुबह भाई की मौत की खबर मिली। दोपहर को मृतकों की लिस्ट जारी की गई।
प्लांट वालों ने रुकने होटल भेजा, होटल वालों ने पैसा मांगा
सनी कुमार अनंत ने बताया कि जब वे जिंदल हॉस्पिटल पहुंचे, उस दौरान वेदांता प्लांट के कुछ लोग वहां मौजूद थे। उन्होंने कहा कि घायलों के परिजनों के ठहरने के लिए पास के एक होटल में व्यवस्था की गई है। सनी के मुताबिक, कंपनी के दो लोग उन्हें होटल तक छोडऩे भी पहुंचे, लेकिन असली परेशानी वहां शुरू हुई। जैसे ही हम होटल पहुंचे और रूम देने की बात की, वहां मौजूद स्टाफ ने हमसे पैसे मांगे। उन्होंने साफ कहा कि पैसे देने के बाद ही रूम मिलेगा, ‘सनी ने बताया, करीब आधे घंटे से 45 मिनट तक हम होटल के रिसेप्शन में ही बैठे रहे। काफी बहस और आग्रह के बाद आखिरकार उन्हें कमरा दिया गया। सनी ने कहा, ‘हम पहले से ही अपने भाई को लेकर परेशान हैं, ऊपर से यहां भी ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा।

























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