रायगढ़। शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में रायगढ़ की एक महान हस्ती, डॉ. जवाहर चौबे अब हमारे बीच नहीं रहे। हॉस्पिटल में इलाज के दौरान बीती रात लगभग सवा 2 बजे, 78 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। रायगढ़ के शिक्षाविद् और ‘चौबे खानदान के गौरव’ के रूप में जाने जाने वाले डॉ. चौबे, वाचस्पति पंडित लोचन प्रसाद पांडेय के नवासे थे। उनके निधन से रायगढ़ के शैक्षणिक, सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में एक अपूरणीय क्षति हुई है।
29 मई 1947 को पुरानी बस्ती, सोनार पारा में जन्मे डॉ. जवाहर चौबे शुरू से ही एक मेधावी व्यक्तित्व थे। उन्होंने अपने जीवन का बड़ा हिस्सा शिक्षा के उत्थान में समर्पित किया। वे किशोरी मोहन त्रिपाठी कन्या महाविद्यालय और कॉमर्स कॉलेज, रायगढ़ में प्राचार्य के पद पर कुशलतापूर्वक कार्यरत रहे। सेवानिवृत्ति के बाद भी, उनकी सामाजिक सक्रियता निरंतर बनी रही। डॉ. चौबे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं, जिसमें उनकी तीन बेटियाँ – गरिमा चौबे, अणिमा, सीमा और कनाडा में रह रहे उनके इकलौते बेटे प्रितेश चौबे शामिल हैं। वे भारतेंदु चौबे के चाचा थे।
शिक्षाविद् शवयात्रा कल, 4 दिसंबर को दोपहर 12 बजे उनके निवास स्थल, कोतरा रोड विकास नगर से प्रारंभ होगी और अंतिम संस्कार सर्किट हाउस रोड स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा। शिक्षाविद डॉ. जवाहर चौबे की अंतिम यात्रा कल, 4 दिसंबर को दोपहर 12 बजे उनके निवास स्थल, कोतरा रोड विकास नगर से प्रारंभ होगी और अंतिम संस्कार सर्किट हाउस रोड स्थित मुक्तिधाम में किया जाएगा।























