रायगढ़, 25 सितंबर। देश में तिरुपति बालाजी मंदिर के लड्डू प्रसाद में जानवरों की चर्बी मिलाए जाने का मामला तूल पकड़ा हुआ है। ऐसे समय में छग शासन के पशुधन विकास विभाग का एक आदेश सामने आया है। विभाग ने सभी जिलों को आदेश दिया है कि वे नवरात्रि के दौरान शक्तिपीठों में देवभोग के घी समेत अन्य उत्पादों को प्रोत्साहित करें। इतने सालों से स्थापित होने के बावजूद छग राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित का ब्रांड देवभोग बहुत ज्यादा लोकप्रिय नहीं हो सका है। देश के दूसरे बड़े ब्रांड की तुलना में बिक्री अब भी कम ही है। कई शहरों में देवभोग के पार्लर भी नहीं खोले जा सके। जहां खुले थे, वहां आपूर्ति बराबर नहीं होने से उनको बंद करना पड़ा।
अब नवरात्रि के पहले पशुधन विकास विभाग ने सभी जिलों को आदेश भेजा है। इसमें कहा गया है कि प्रदेश में 700 दुग्ध सहकारी समितियों से संबद्ध 30 हजार से अधिक पशुपालक परिवार सुबह-शाम दूध उपलब्ध कराते हैं। देवभोग के उत्पाद गुणवत्तायुक्त होते हैं। इसलिए नवरात्रि पर शक्तिपीठों में ज्योति प्रज्जवलन और प्रसाद निर्माण के लिए देवभोग घी के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना है। यह आदेश ऐसे समय में आया है जब देश में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद को लेकर बवाल मचा हुआ है। छग में देवभोग ब्रांड के उत्पादों को इस्तेमाल करने के लिए अब पत्र लिखा गया है। इससे राज्य का ब्रांड भी आगे बढ़ेगा और शुद्धता की गारंटी भी रहेगी।























