- सेफ्टी ऑडिट पर सवाल, एनटीपीसी की साख पर लगी ठेस, अब डैमेज कंट्रोल की कोशिश
रायगढ़। वेदांता पावर प्लांट में हादसे के बाद कई सवाल अनुत्तरित हैं। वेदांता लिमिटेड को प्लांट ऑपरेट करने के लिए एक साल पहले ही कन्सेन्ट टू ऑपरेट मिला था। स्टीम ब्लोइंग भी एक ही साल पहले हुआ था। सवाल यह है कि एक ही साल में बॉयलर का सिस्टम कैसे खराब हो गया। अथेना पावर ने सिंघीतराई में 1200 मेगावाट पावर प्लांट स्थापित करना शुरू किया था। कंपनी ने एक यूनिट भी तैयार नहीं किया। ज्यादा समय तो प्लांट बंद ही पड़ा रहा। प्लांट को वेदांता लिमिटेड ने 2022 में खरीदा। 2025 में इसे चलाने का ठेका एनजीएसएल को दे दिया गया। वेदांता लिमिटेड ने खुद इस प्लांट को चलाने के बजाय एनटीपीसी लिमिटेड और जनरल इलेक्ट्रिक पर भरोसा किया।
जुलाई 2022 में अधिग्रहण के बाद जनवरी 2024 में पर्यावरणीय मंजूरी मिली।मार्च 2024 में फॉरेस्ट क्लीयरेंस मिला। प्लांट परिसर में इमरजेंसी प्लान को फरवरी 2025 में एप्रूवल मिला। अप्रैल 2025 में कंपनी को कन्सेन्ट टू ऑपरेट मिला। माच-अप्रैल में ही कंपनी को यूनिट 1 के बॉयलर लाइट अप और स्टीम ब्लोइंग किया गया। यही वो समय था जब बॉयलर का परीक्षण किया गया होगा। बॉयलर इंस्पेक्टोरेट ने जब परीक्षण किया होगा तब सीमलेस ट्यूब को भी देखा होगा। इसके बाद ही ट्रायल रन किया गया। उस समय चूक हुई जिसके कारण 24 मजदूरों की मौत हो गई।
ट्यूब की हालत पर नहीं की सही रिपोर्टिंग
वेदांता लिमिटेड छत्तीसगढ़ थर्मल पावर प्लांट सिंघीतराई में बॉयलर ट्यूब में स्टीम फ्लो करने के पहले ही इसका सेफ्टी चेक हुआ था। ट्यूब के अंदर और बाहर की स्थिति देखकर थिकनेस चेक करनी थी। इसके बाद ही प्लांट को चलाने की अनुमति ली गई। वेदांता प्रबंधन के साथ एनटीपीसी लिमिटेड और जनरल इलेक्ट्रिक की भी जवाबदेही बन गई है।























