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सक्ती के दमाऊधारा में काल बनी काई, झरने के कुंड से निकला दुर्ग के प्रतीक का शव

Sakti news
  • रैनखोल घूमने के बाद दमाऊधारा पहुंचे थे 6 दोस्त, पैर फिसलने से गहरे पानी में समा गया था 20 वर्षीय युवक

सक्ती। प्रसिद्ध पर्यटन स्थल दमाऊधारा में मंगलवार को हुए हादसे का बेहद दुखद अंत हुआ। झरने के तेज बहाव में बहे दुर्ग निवासी 20 वर्षीय प्रतीक कंवर की तलाश में जुटी बचाव टीम को आखिरकार बुधवार को सफलता मिल गई। करीब 24 घंटे चले लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद गोताखोरों ने युवक का शव झरने के नीचे गहरे कुंड से बरामद कर लिया है। युवक का बेजान शरीर पानी से बाहर आते ही परिजनों और दोस्तों में चीख-पुकार मच गई।

दोस्तों की आंखों के सामने ओझल हो गया था प्रतीक

दुर्ग-भिलाई क्षेत्र से छह नवयुवकों की टोली सक्ती जिले के खूबसूरत नजारों का लुत्फ उठाने निकली थी। प्रतीक कंवर अपने साथी उदय साहू, चेलक लहरे, तेजस साहू, साहिल राव और योगेश वर्मा के साथ सोमवार शाम पहले रैनखोल पहुंचा। इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 9 बजे सभी दोस्त दमाऊधारा झरने का नजारा देखने पहुंचे।
छह में से चार दोस्त झरने के ऊपरी हिस्से में नहाने के लिए उतर गए, जबकि दो साथी नीचे ही मौजूद थे। इसी दौरान पत्थरों की काई और फिसलन के कारण प्रतीक का अचानक संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे तेज धारा में जा गिरा। ऊपर मौजूद साथियों ने उसे बचाने के लिए तुरंत हाथ-पैर मारे और आवाज लगाई, लेकिन पानी का बहाव इतना खौफनाक था कि वह देखते ही देखते गहराई में ओझल हो गया।

रात के अंधेरे ने रोकी थी राह, सुबह SDRF ने निकाला शव

हादसे की खबर मिलते ही नगरदा पुलिस, एएसपी पंकज पटेल और जांजगीर-चांपा से बुलाई गई DDRF व SDRF की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। मंगलवार की देर शाम तक झरने के कोने-कोने में सघन सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन युवक का कोई अतापता नहीं चला। घने अंधेरे और पानी के खतरे को देखते हुए मंगलवार रात रेस्क्यू ऑपरेशन को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। बुधवार तड़के सूरज की पहली किरण के साथ पुलिस और गोताखोरों की टीम ने एक बार फिर दमाऊधारा के कुंड को खंगालना शुरू किया। पानी के नीचे पत्थरों के बीच भारी मशक्कत के बाद आखिरकार गोताखोरों ने प्रतीक के शव को ढूंढ निकाला।

पंचनामा के बाद शव परिजनों को सौंपने की तैयारी

नगरदा पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर वैधानिक पंचनामा कार्रवाई शुरू कर दी है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भिजवाया गया है, जिसके बाद इसे रोते-बिलखते परिजनों के सुपुर्द कर दिया जाएगा।
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि प्राकृतिक जलप्रपातों की खूबसूरती के बीच जरा सी असावधानी और लापरवाही किस तरह हंसते-खेलते परिवारों की खुशियों को मातम में बदल देती है।

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Editorial

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