बिलासपुर। पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से रेंज के पुलिस अधीक्षकों और राजपत्रित अधिकारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में पुलिस महानिदेशक द्वारा दिए गए निर्देशों के परिपालन और थानों की कार्यप्रणाली को पारदर्शी व दुरुस्त करने को लेकर विस्तृत समीक्षा की गई। इस दौरान बेसिक पुलिसिंग, फील्ड सुपरविजन और लंबित मामलों के त्वरित निराकरण के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए।
थानों का भौतिक निरीक्षण और मालखाना जांच अनिवार्य
समीक्षा बैठक में आईजी ने निर्देश दिए कि एसडीओपी और सीएसपी थानों का नियमित भ्रमण व निरीक्षण करें तथा मौके पर ही हस्तलिखित भ्रमण रिपोर्ट तैयार करें। वार्षिक निरीक्षण के दौरान मालखाने की संपत्तियों का बारीकी से मिलान किया जाए ताकि जब्त माल और केस प्रॉपर्टी की ‘चैन ऑफ कस्टडी’ सही रहे और माल गायब होने या मिसमैच होने की घटनाओं पर रोक लग सके। इसके अलावा सभी राजपत्रित अधिकारियों को अपनी दैनिक डायरी अनिवार्य रूप से संधारित करने को कहा गया है।
गंभीर अपराधों में फील्ड सुपरविजन और एनडीपीएस नियमों की सख्ती
आईजी रामगोपाल गर्ग ने कहा कि गंभीर और संवेदनशील अपराधों व मर्ग जांच के दौरान अधिकारी केवल औपचारिकता न निभाएं, बल्कि मौके पर जाकर विवेचकों को मार्गदर्शन दें। अधिकारियों को हस्तलिखित सुपरविजन नोट तैयार कर केस डायरी में शामिल करने और उसे क्राइम रिव्यू एप्लीकेशन (CRA) पोर्टल पर अपलोड करने के निर्देश दिए गए।
एनडीपीएस मामलों में दोषमुक्ति रोकने के लिए धारा 50 का कड़ाई से पालन करने को कहा गया है। कम से कम 25 से 50 प्रतिशत मामलों में एएनटीएफ प्रभारी या राजपत्रित अधिकारी स्वयं मौके पर उपस्थित रहकर पंचनामा और जब्ती की कार्यवाही कराएंगे। साथ ही वाहन मालिकों को आरोपी बनाने से पहले पर्याप्त साक्ष्य जुटाने और वाहनों को विधिवत राजसात करने के निर्देश दिए गए।
सड़क दुर्घटनाओं की जांच और आदतन अपराधियों पर कार्रवाई
सड़क दुर्घटना के मामलों में ई-डीएआर (e-DAR) पोर्टल पर मौके से तत्काल डेटा प्रविष्टि सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। फर्जी इंश्योरेंस क्लेम और चालक बदलने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए दुर्घटना के समय वाहन चालक का टावर लोकेशन और घटनास्थल का सीसीटीवी फुटेज जब्त करना अनिवार्य किया गया है।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि कोई आदतन अपराधी जमानत पर छूटने के बाद दोबारा अपराध करता है, तो न्यायालय में उसकी जमानत निरस्त कराने हेतु तत्काल आवेदन दिया जाए। इसके अलावा 1 वर्ष से अधिक पुराने लंबित मामलों और उच्च न्यायालय से जुड़े प्रकरणों के लिए अनुभागवार एक्शन प्लान बनाकर निराकरण करने तथा जनता से शालीन व्यवहार बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।
























