- हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत, भगोड़ा घोषित होकर बैंक खाते सीज हुए तो टूट गया हौसला, अब रिमांड पर खुलेंगे राज़
रायगढ़। नाबालिग भांजी से दुष्कर्म के आरोप में महीनों से इलाके में हड़कंप मचाने वाला भगोड़ा पुष्पेंद्र उर्फ अमित गोयल बुधवार को आखिर पुलिस के जाल में समा गया। लगातार ठिकाने बदलकर पुलिस को छकाता रहा आरोपी जब कहीं से भी राहत की उम्मीद नहीं बची तो खुद घरघोड़ा न्यायालय पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। न्यायालय में पेशी के तुरंत बाद छाल पुलिस ने उसे अपनी गिरफ्त में लेकर रिमांड पर ले लिया। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने कानून के हर दरवाजे पर दस्तक दी थी। पहले निचली अदालत में अग्रिम जमानत की गुहार लगाई, जब वहां बात नहीं बनी तो सीधे बिलासपुर हाईकोर्ट जा पहुंचा।
मगर वारदात की संगीनता और पुलिस के मजबूत पक्ष के आगे उसकी हर कोशिश नाकाम रही। कानून के दरवाजे बंद होते देख न्यायालय ने उसे भगोड़ा करार दिया और सिर पर नकद इनाम रख दिया।इसके बाद पुलिस ने आरोपी की जड़ें हिलाने की ठान ली। उसके बैंक खाते सीज करा दिए गए और चल अचल संपत्ति पर कुर्की की तैयारी शुरू हो गई। पैसा बंद, ठिकाना बंद और चारों तरफ से घिरता जाल देख आरोपी का पूरा नेटवर्क बिखर गया। महीनों तक शह देने वालों का साथ छूटते ही उसके पास सरेंडर के अलावा कोई चारा नहीं बचा। सरेंडर के साथ ही मामला थमा नहीं, बल्कि असली पूछताछ अब शुरू हुई है।
छाल पुलिस रिमांड में यह भेद खोलने में जुटी है कि महीनों तक आरोपी किन ठिकानों पर छिपा रहा और किसकी शह पर पुलिस की नजरों से दूर रहा। पुलिस सूत्रों के अनुसार यदि इस दौरान किसी ने उसे पनाह दी या मदद पहुंचाई तो जांच का दायरा उस तक भी बढ़ सकता है। आरोपी के सरेंडर से पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है, लेकिन असली फैसला अब भी अदालत के हाथ में है। पुलिस का कहना है कि रिमांड में मिलने वाले सबूतों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।























