- चकानयन और मुन्नेस्वरम मंदिर की अद्भुत कलाकारी ने मोहा मन, नवरात्रि की धूम में जयकारों से गूंज उठी संस्कारधानी
रायगढ़ (केलो प्रवाह)। हवा में घुलती धूप-लोहबान की महक, देवी सूक्त के गूंजते मंत्र और शंख-मंजीरों की ध्वनि… संस्कारधानी एक बार फिर आस्था के जीवंत कैनवास में तब्दील हो चुकी है। आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 11 अक्टूबर से शुरू हुए शारदीय नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना हो रही है। एक ओर मंदिरों में अखंड ज्योति जल रही है और दुर्गा सप्तशती के पाठ हो रहे हैं, तो दूसरी ओर सार्वजनिक दुर्गोत्सव की धूम है। महापंचमी की रात और षष्ठी को गाजे-बाजे, ढोल-ताशों और डीजे की धुन पर जयकारों के बीच मां भवानी की प्रतिमाओं को पंडालों तक लाया गया। शुक्रवार को महाषष्ठी पर पूजन के साथ ही शहर के कुछ पंडालों के पट खुल गए और श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन शुरू कर दिए।
शनिवार को महासप्तमी पर शहर के ज्यादातर पंडालों में विधि-विधान से मां दुर्गा विराजेंगी और श्रद्धालुओं के लिए पट खुलेंगे। रायगढ़ में मुख्य रूप से सप्तमी, अष्टमी और नवमी इन्हीं तीन दिनों का विशेष दुर्गोत्सव मनाया जाता है। शहर के जीरो पॉइंट सत्तीगुड़ी चौक से लेकर कोतरा रोड, थाना चौक, दरोगापारा, स्टेशन चौक, स्टेशन रोड काली मंदिर, गुजराती पारा, गांधीगंज, हंडी चौक, गद्दी चौक, गांजा चौक, गौशाला पारा, केवड़ाबाड़ी, रामभांठा, गौरी शंकर मंदिर चौक और ढिमरापुर चौक तक आस्था का उल्लास देखते ही बनता है। शहर के दूसरे छोर पर संजीवनी परिसर, चक्रधर नगर चौक, दक्षिण चक्रधर नगर, अतरमुड़ा, जूटमिल, कोष्टापारा, सहस्त्रबाहु चौक और बोईरदादर सहित कई अन्य स्थानों पर सजे पंडाल श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं।
मां जगदंबे के दरबार सजने से चौक-चौराहे और सड़कें रोशनी से नहा उठी हैं। पंडालों में सुबह से देर रात तक शेरावाली मैया के भजन बज रहे हैं और माहौल भक्तिमय है। बाजार गुलजार हैं और कई जगहों पर गरबा की तैयारियां जोरों पर हैं। सती माई, बूढ़ी माई, बंजारी और महामाया मंदिरों में भी अलसुबह से दर्शन के लिए कतारें लग रही हैं। नवरात्र पर घर-घर माता रानी की पूजा-अर्चना होती है, लेकिन रायगढ़ में इन तीन दिनों की रौनक ही कुछ और होती है। शहर के सार्वजनिक पंडालों में विराजमान मां दुर्गा के दर्शन के लिए हजारों श्रद्धालु उमड़ पड़ते हैं और आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। इस बार पंचांगों में अष्टमी और नवमी की तिथि को लेकर मतभेद है।
रायगढ़ के पुरोहित रितेश शुक्ला के अनुसार, एक पंचांग में अष्टमी और नवमी दोनों 19 अक्टूबर को बताई गई हैं, लेकिन तीन दिन की स्थानीय परंपरा को देखते हुए कई पंडालों में शनिवार 17 अक्टूबर को सप्तमी, रविवार 18 अक्टूबर को अष्टमी और सोमवार 19 अक्टूबर को नवमी की पूजा होगी। इस रौनक के पीछे मूर्तिकारों की उंगलियां हैं, कारीगरों की जागती रातें हैं, आयोजन समितियों की महीनों की तैयारी है और पंडितों का विधि-विधान है। इन सबकी साधना का ही नतीजा है कि शहर के पंडाल अपनी भव्यता और अनूठी थीम से श्रद्धालुओं को खींच रहे हैं। ‘केलो प्रवाह’ ने शहर के प्रमुख पंडालों की थीम और सजावट का जायजा लिया। आइए, रूबरू होते हैं इनकी छटा से।










भव्य कलश यात्राओं में दिखा आस्था और शौर्य का संगम
महाषष्ठी पर शुक्रवार को विभिन्न पूजा समितियों की कलश यात्राएं केलो नदी के घाटों की ओर बढ़ीं, तो पूरा यात्रा मार्ग पीले-लाल परिधानों के रंग में रंग गया। यात्रा की अगुवाई श्वेत परिधान और पीले गमछे में, गले में गेंदे की माला और माथे पर तिलक लगाए, नंगे पांव तलवारें थामे युवाओं की टोली कर रही थी, जो शौर्य और अनुशासन की मिसाल बनी। उनके पीछे देवी स्वरूपा एक श्रद्धालु महिला सिर पर मुख्य कलश लिए चल रही थीं और सैकड़ों महिलाएं पूरे श्रृंगार में, माता के रूप में सिर पर कलश लिए कतारबद्ध थीं। आम के पत्तों और नारियल से सजे लाल कलशों पर स्वास्तिक, ‘ॐ’ और ‘जय माता दी’ उकेरे गए थे। नन्ही बालिकाएं भी देवी का रूप धारण किए इस कतार में शामिल रहीं। छत्तीसगढ़ी जस गीतों और भजनों की गूंज के बीच कई महिलाओं में झुपना, यानी देवी के भीतर आने की आस्था साफ दिखी। घाट पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कलशों में पवित्र जल भरा गया, जिससे पूजा का विधिवत शुभारंभ होता है। माता समलाई के मंदिर में दर्शन के बाद यात्रा पंडालों में लौटी और विधि-विधान से कलश स्थापित किए गए।










चक्रधर नगर में साकार हुआ श्री जगन्नाथ का ‘चकानयन’ स्वरूप
वर्ष 1987 में स्थापित चक्रधर नगर दुर्गा उत्सव समिति शहर के प्रमुख और प्राचीन आयोजनों में गिनी जाती है और इस वर्ष स्थापना के 39 वर्ष पूरे कर चुकी है। समिति ने इस बार आस्था और कला का ऐसा संगम रचा है कि पंडाल के सामने पहुंचते ही श्रद्धालुओं के कदम थम जाते हैं। कार्यकारी अध्यक्ष सुशील गुप्ता ने बताया कि पंडाल को भगवान श्री जगन्नाथ के ‘चकानयन’ थीम पर भव्य रूप दिया गया है। सुनहरी जालीदार नक्काशी वाले नीले मंदिर के ऊपर श्याम वर्ण में उकेरी गई प्रभु की विशाल गोल आंखें रात में रोशनी से दमक उठती हैं, मानो जगन्नाथ स्वयं भक्तों को निहार रहे हों। शिखर पर सुनहरा चक्र और लाल ध्वज इस स्वरूप को पूरा करते हैं। खड़गपुर से आए कलाकार सागर मैत्री ने अपनी टीम के साथ इसे आकार दिया है। पंडाल के भीतर माता रानी की प्रतिमा पूरी तरह पारंपरिक बंगाली शैली में गढ़ी गई है। लाल पृष्ठभूमि के बीच डाकेर साज की सफेद और बारीक कलाकृतियों वाली सजावट में माता का रूप अलौकिक नजर आता है। उनके साथ गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी हैं। पूजा-पाठ विधि-विधान से संपन्न कराने के लिए सिद्ध पीठ तारापीठ से पंडित तारक शास्त्री विशेष रूप से रायगढ़ पहुंचे हैं, जिनकी अगुवाई में पूजन पूरे विधि-विधान से होगा।

मयूर महल में विराजेंगी गांधीगंज की महारानी
मित्र कला मंदिर समिति का गांधीगंज स्थित दुर्गोत्सव इस बार भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। समिति के अध्यक्ष गोपाल बापोडिया ने बताया कि स्थापना के 66वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी समिति इस बार ‘गांधीगंज की महारानी’ को विशाल और कलात्मक ‘मयूर महल’ में विराजमान कर रही है। सफेद और सुनहरे रंगों में सजे इस महल के प्रवेश द्वार और शिखरों पर पंख फैलाए मयूर आकृतियां उकेरी गई हैं। 1600 स्क्वायर फीट के इस पंडाल की तैयारी चार महीने पहले शुरू हो गई थी, जिसे खरसिया के आर्किटेक्ट बापी के निर्देशन में ओम टेंट हाउस ने भव्य रूप दिया है। भीतर सुनहरी जालीदार नक्काशी, फूलों की सजावट और भव्य झूमरों से सजे दरबार में आज महासप्तमी से माता रानी शेर पर सवार अष्टभुजी रूप में लाल और सुनहरे गोटेदार परिधान में विराजमान होंगी। उनके साथ गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और मयूर पर विराजे कार्तिकेय की प्रतिमाएं भी हैं, जिन्हें सक्ती के मूर्तिकार कार्तिक ने गढ़ा है। बरमकेला से आए पुजारी संन्यासी महाराज के सान्निध्य में पूरे विधि-विधान से पूजा होगी। ढोल, निसान और ताशा की गूंज से पूरा गांधीगंज भक्ति के रंग में रंगा है।



अंबेडकर चौक पर साक्षात् उतरा पुरी धाम
दक्षिण चक्रधर नगर अतरमुड़ा स्थित अंबेडकर चौक की दुर्गा पूजा समिति का इतिहास 1971 से जुड़ा है। समिति के अध्यक्ष आर.के. गुप्ता ने बताया कि पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के लोगों ने यहां बंगाली विधि से पूजा की नींव रखी थी, जो आज भी उसी प्रामाणिकता से जारी है। इस बार समिति ने आस्था और कला का ऐसा संगम रचा है कि अंबेडकर चौक पर पुरी धाम का अहसास होता है। कलकत्ता के कलाकार टीपू और उनकी टीम ने 3,600 वर्ग फीट क्षेत्र में 100 फीट ऊंचा भगवान जगन्नाथ का भव्य मंदिर खड़ा किया है। सफेद शिखरों और पत्थर जैसी भूरी परतों वाले इस मंदिर के प्रवेश द्वार पर चक्र उकेरा गया है। पंडाल के ठीक सामने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य तस्वीरें विराजमान हैं, जिनके दर्शन पंडाल पर नजर पड़ते ही सबसे पहले होते हैं। भीतर महाषष्ठी से ही माता रानी विशुद्ध बंगाली थीम पर पूरी भव्यता के साथ विराजमान हैं और दर्शनार्थियों द्वारा लगातार दर्शन किए जा रहे हैं। कलकत्ता से विशेष रूप से पहुंचे पुरोहित सुखदेव भट्टाचार्य पारंपरिक बंगाली पद्धति से पूजन करा रहे हैं। धार्मिक आयोजन के साथ यह समिति अपनी उपहार योजना के लिए भी चर्चा में है।


कोतरा रोड पर साकार हुआ मुन्नेस्वरम मंदिर
कोतरा रोड पर नवप्रभात दुर्गा पूजन समिति का पंडाल इस बार अपनी मंदिरनुमा भव्य बनावट के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। कोलकाता के कारीगरों ने इसे मुन्नेस्वरम मंदिर की थीम पर तैयार किया है। सामने से देखने पर इसका बहुस्तरीय गोपुरम दक्षिण भारतीय मंदिरों की स्थापत्य शैली की झलक देता है। नीले-धूसर ढांचे और सफेद शिखर पर सुनहरी सजावट, अलग-अलग स्तरों पर उकेरी गई देवी-देवताओं की आकृतियां और बारीक नक्काशी इसे खास बनाती हैं। प्रवेश द्वार के ऊपर और दोनों ओर बनी आकृतियां मंदिर के स्वरूप को और उभारती हैं। इस थीम का नाता रामायण की मान्यताओं से भी है। मान्यता है कि रावण वध के बाद ब्रह्महत्या दोष से मुक्ति के लिए भगवान शिव के निर्देश पर श्रीराम ने मुन्नेस्वरम में शिवलिंग की पूजा की थी। पंडाल में विराजित मां दुर्गा की प्रतिमा सारंगढ़ के यादव मूर्ति कला केंद्र ने तैयार की है। रोशनी की व्यवस्था राउरकेला की गुप्ता लाइट ने संभाली है, जबकि माता के आगमन पर मुंगेली के मां शीतला डीजे की धुन गूंजी। संत श्री कैलाश महाराज के सान्निध्य में यहां 17 से 20 अक्टूबर तक दुर्गा पूजा उत्सव आयोजित होगा। प्रतिदिन सुबह और शाम 7:30 बजे आरती होगी, जबकि नवमी के दिन भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

60 फीट के ‘लेटर बॉक्स’ में विराजेंगी मां दुर्गा
रामनिवास टॉकीज चौक स्थित संजीवनी परिसर में इस वर्ष दुर्गा उत्सव का पंडाल अपनी अनूठी थीम के कारण खास आकर्षण बनने जा रहा है। वर्ष 1988 से दुर्गोत्सव का आयोजन कर रहा युवक संघ इस बार डाकघर के पारंपरिक लाल लेटर बॉक्स की थीम पर 60 फीट ऊंचा विशाल पंडाल तैयार करवा रहा है। कोलकाता से आए कारीगर इसे लेटर बॉक्स का स्वरूप दे रहे हैं। इसके बाहरी हिस्से पर ‘पत्र’, ‘LETTER’, ‘RAIGARH’ और पिन कोड ‘496001’ अंकित किया गया है। युवक संघ के संरक्षक, पूर्व सभापति और वर्तमान भाजपा पार्षद सुरेश गोयल ने बताया कि इस थीम के पीछे उद्देश्य श्रद्धालुओं की आस्था को चिट्ठी लिखने की पुरानी परंपरा से जोड़ना है। पंडाल की परिकल्पना इस तरह की गई है कि इसके भीतर प्रवेश करने पर भक्तों को किसी विशाल पोस्ट बॉक्स के अंदर होने का अनुभव होगा। जब वे वहां सच्चे मन से मन्नत मांगेंगे, तो यह पंडाल रूपी पोस्ट बॉक्स ही उनकी भावनाओं और मनोकामनाओं को सीधे माता तक पहुंचाने का जरिया बनेगा। सुरेश गोयल के अनुसार, इस प्रतीकात्मक पोस्ट बॉक्स के माध्यम से भक्त अपनी मन्नतें मां के चरणों तक पहुंचाने की कल्पना के साथ यहां आएंगे। स्मार्टफोन और इंटरनेट के दौर में चिट्ठियों की पुरानी परंपरा को आस्था से जोड़ने वाली यह पहल इस बार के दुर्गोत्सव को विशिष्ट स्वरूप दे रही है।

झोपड़ी की थीम पर सजा हंडी चौक का पंडाल
रायगढ़ के हंडी चौक की दुर्गा पूजा समिति धार्मिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। पिछले 37 वर्षों से यहां दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर उत्सव मनाया जा रहा है, जिसकी व्यवस्थाओं में मुस्लिम समाज के सदस्य शेख सलीम नियारिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। 60 वर्षीय शेख सलीम नियारिया कांग्रेस के पार्षद होने के साथ नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष भी हैं और दुर्गा उत्सव के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। कार्यक्रम अध्यक्ष आलोक शर्मा ने बताया कि समिति इस वर्ष ग्रामीण झोपड़ी की थीम पर पंडाल तैयार कर रही है, जिसके माध्यम से ‘बेटी पढ़ाओ’ का संदेश दिया जा रहा है। पंडाल की बनावट में ग्रामीण परिवेश की झलक के साथ बेटियों की शिक्षा के महत्व को दर्शाने का प्रयास किया गया है। देवाशीष पाल ने टेंट निर्माण की जिम्मेदारी संभाली है, जबकि पंडित अमित शर्मा पूजा-अर्चना संपन्न कराएंगे। धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक संदेश और आपसी सद्भाव का यह संगम हंडी चौक के दुर्गोत्सव को खास पहचान देता है।

बंगाली रंग में सजी मिलनी कालीबाड़ी

सिविल लाइन स्थित मिलनी कालीबाड़ी में इस बार 92वें वर्ष का दुर्गा उत्सव बंगाली रंग में सजा है। यहां 1935 से “सर्वशक्ति दुर्गा पूजा एवं काली पूजा” की परंपरा चली आ रही है और उत्सव बंगाली थीम पर ही आयोजित होता है। सुनहरे अलंकरण वाली मेहराबदार पृष्ठभूमि के बीच दुर्गा प्रतिमा के साथ गणेश, लक्ष्मी, सरस्वती और कार्तिकेय की प्रतिमाएं एक ही मंच पर सजी हैं। पीछे रंग-बिरंगे फूलों की सजावट है और फर्श पर अल्पना उकेरी गई है। इस कालीबाड़ी की खास पहचान यह है कि यहां मां काली का स्वरूप स्थायी रूप से विराजमान है। पंडित पल्लभ कुमार भट्टाचार्य नियमित पूजा कराते हैं और कोलकाता से आए ढाकी की ढाक की थाप उत्सव को बंगाली रंग देती है। संधि पूजा, पुष्पांजलि और विजया दशमी पर सिंदूर खेला जैसी बंगाली परंपराएं यहां पूरे विधि-विधान से निभाई जाती हैं।

कोष्टापारा में बांस शिल्प से उकेरा मां दुर्गा का भव्य स्वरूप
रायगढ़ के कोष्टापारा में नवयुवक कला समिति द्वारा पिछले करीब 20 वर्षों से दुर्गा उत्सव धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस वर्ष पंडाल में मां दुर्गा की विशाल मुखाकृति को हस्तशिल्प की अनूठी थीम पर तैयार किया गया है। समिति के योगेश गुप्ता ने बताया कि इस कलाकृति का निर्माण रायगढ़ के बांस शिल्पकारों ने किया है। बांस की बारीक बुनाई और पारंपरिक हस्तकला से मां के मुख को आकर्षक स्वरूप दिया गया है। आंखों, मुकुट, आभूषणों और फूलों से की गई सजावट इस कलाकृति की सुंदरता को और निखारती है। स्थानीय कलाकारों की शिल्पकला और उनकी मेहनत से तैयार मां दुर्गा का यह स्वरूप पंडाल को विशिष्ट पहचान दे रहा है। धार्मिक आस्था के साथ स्थानीय बांस शिल्प और हस्तकला को प्रमुखता देने वाली यह थीम श्रद्धालुओं के लिए खास आकर्षण बनी हुई है।

सत्तीगुड़ी चौक में फूलों से सजा माता का दरबार
नवोदित दुर्गा उत्सव समिति के प्रमुख विकास ठेठवार ने बताया कि समिति वर्ष 1989 से लगातार सत्तीगुड़ी चौक में दुर्गा पूजा का आयोजन कर रही है। उन्होंने बताया कि पहले शहर के राजेंद्र अग्रवाल और उनकी टीम हैंडलूम के सामने इसी समिति के माध्यम से पूजा कराती थी, जबकि बीते 20 वर्षों से चौक में माता की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव मनाया जा रहा है। ठेठवार के अनुसार इस वर्ष भी उत्सव को खास बनाने की तैयारी की गई है। पूरा पंडाल फूलों से सजाया गया है और पूरे चौक को रंग-बिरंगी लाइटों से गुलजार किया गया है। सप्तमी पर शनिवार को पंडाल में माता की विशाल प्रतिमा विराजेगी, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनेगी। पंडाल के बगल में शिव मंदिर और भरतकूप है, जबकि पीपल के पेड़ के नीचे बजरंगबली का छोटा सा मंदिर भी है, इसलिए माता के दर्शन के साथ चौक पर कई देवस्थलों के दर्शन एक साथ हो सकेंगे। वर्ष 1989 से शुक्ला परिवार के पंडित ही यहां पूजा कराते आ रहे हैं और इस वर्ष भी पुजारी रितेश शुक्ला विधि-विधान संपन्न कराएंगे। नवमी के दिन भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

गुजरातीपारा में सजा भव्य दुर्गा पंडाल
रायगढ़ के तोड़ा राम जोगी मार्ग स्थित स्टेशन चौक, गुजरातीपारा में वर्ष 2011 से मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर उत्सव मनाया जा रहा है। टीम के सदस्य जुगनू राठौर ने बताया कि पिछले 16 वर्षों से सभी सदस्य मां दुर्गा के प्रति समर्पण भाव के साथ दुर्गा उत्सव मनाते आ रहे हैं। यहां मां दुर्गा के स्वागत के लिए हर साल पंडाल को भव्य और आकर्षक रूप दिया जाता है। पंडाल की साज-सज्जा, रंग-बिरंगी रोशनी और माता रानी की प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहती है। पंडाल को सजाने में बारीकियों का खास ध्यान रखा जाता है, जिससे नवरात्र के दौरान यहां उत्सव का भव्य वातावरण नजर आता है। इस वर्ष भी पंडाल को खास रूप देने के लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। आयोजन में अध्यक्ष कुलदीप नरसिंग, कुंदन सिंह, सतपाल घोरे और शारदा गहलोत सहित पूरी टीम जुटी हुई है।

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