छोड़कर सामग्री पर जाएँ

राजस्व मंडल के आदेश को साईड में रखकर सुनना होगा पक्ष

IMG fb930332 f5f1 4dde 8be1 17fb2d4a951f
  • बैकुंठपुर की जमीन को लेकर हाईकोर्ट का अहम आदेश, समझौते के बाद हुए आदेश को आधार बनाकर चल रही थी प्रक्रिया

रायगढ़, (केलो प्रवाह)। बैकुंठपुर की विवादित भूमि पर हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश दिया है। स्व. सईदा खान के उत्तराधिकारी होने का दावा करने वाले ने अदालत ने याचिका लगाई थी। राजस्व मंडल के जिस आदेश को आधार बनाकर पुन: नामांतरण प्रक्रिया शुरू की गई थी, उसी को किनारे रखते हुए कार्यवाही करने का आदेश दिया गया है। रायगढ़ जिले के लोगों में सबसे बड़ी भूख जमीनों की है। किसी भी तरह से जमीनें अपने नाम कराने की जिद ने अनेक राजस्व विवादों को जन्म दिया है। राजस्व विभाग भी साफ दिखने वाले मामलों में भी लाभ-हानि का परीक्षण करता है, उसके बाद कोई आदेश देता है।

सोचिए तीन साल पहले अपर आयुक्त ने जिस नामांतरण को निरस्त किया था, अब उन्हीं के नाम पर वापस जमीन करने के लिए प्रयास हो रहे हैं। जमीन पर आठ खातेदार हैं लेकिन उनको सूचना भी नहीं दी गई। यह बैकुंठपुर की भूमि खनं 127/2 रकबा 1.4070 हे. और 135/5क रकबा 0.0490 हे. से जुड़ा है। मिली जानकारी के मुताबिक 2012 में इस जमीन की बिक्री मनीराम सिंघानिया ने रेड कारपेट बिल्डकॉन व अन्य को किया था। इसके विरुद्ध प्रदीप सिंघानिया ने एसडीएम और अपर कलेक्टर न्यायालय में अपील की थी लेकिन उनका आवेदन ही निरस्त कर दिया।

इसके बाद अपर आयुक्त के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत किया गया। 2023 में अपर आयुक्त ने उस नामांतरण को ही निरस्त कर दिया जिसके बाद जमीन सईदा खान व अन्य के नाम पर दर्ज हुई। इस आदेश के विरुद्ध रेड कारपेट बिल्डकॉन की ओर से राजस्व मंडल में अपील की गई थी। राजस्व मंडल ने 2 जुलाई 2026 को आदेश पारित कर राजीनामा के आधार पर बिना गुण-दोष पर कोई निष्कर्ष देते हुए प्रकरण समाप्त करने का आदेश दिया था। इसके बाद नामांतरण का प्रकरण शुरू कर दिया गया।

याचिकाकर्ता लतीफ उर रहमान पिता वाहिद रहमान ने स्वयं को सईदा खान का भतीजा होने का दावा करते हुए भूमि पर दावा किया है। नि:संतान सईदा की मृत्यु 2006 में हो चुकी है। उनके विधिक वारिसानों को सूचना दिए बिना जमीन का नामांतरण करने का प्रयास किया जा रहा है। लतीफ ने हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। अदालत ने आदेश में राजस्व मंडल द्वारा दिए गए आदेश को किनारे रखकर कार्यवाही करने का आदेश दिया है।

क्या कहा है अदालत ने
याचिकाकर्ता का कहना है कि प्रदीप सिंघानिया ने राजस्व अधिकारियों के समक्ष कार्यवाही को चुनौती दी थी। प्रदीप सिंघानिया और रेड कारपेट बिल्डकॉन के बीच समझौते के बाद 2 जुलाई 2026 के आदेश में पुनरीक्षण कार्यवाही बंद कर दी गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि संबंधित संपत्ति का वह वारिस है लेकिन उसको नहीं सुना गया। याचिका कर्ता के अधिवक्ता आनंद शुक्ला ने कहा कि विवादित आदेश के पारित होने के बाद, रेड कार्पेट बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड ने तहसीलदार, रायगढ़ के समक्ष नामांतरण आवेदन प्रस्तुत किया।

याचिकाकर्ता ने आपत्ति दर्ज कराई। आदेश एक ऐसे समझौते के आधार पर पारित किया गया था जिसमें याचिकाकर्ता पक्षकार नहीं था और संपत्ति में हिस्सेदार होने के बावजूद उसे सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता को राजस्व प्राधिकारी के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज करनी है। राजस्व अधिकारी संबंधित पक्षों को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के बाद, हाईकोर्ट की टिप्पणी और राजस्व मंडल के समक्ष दर्ज किए गए समझौते से प्रभावित हुए बिना, विधि अनुसार निर्णय करेगा।

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: