रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले छोटे से कस्बे घरघोड़ा के एक होनहार युवा ने अपनी मेहनत और अटूट संकल्प से पूरे देश में जिले का नाम रोशन किया है। अक्षत किशोर मिश्रा ने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और नौसेना अकादमी (NA) की परीक्षा में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए अखिल भारतीय स्तर पर 30वां स्थान प्राप्त किया है। उनकी इस सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने सर्विस सिलेक्शन बोर्ड (SSB) के इंटरव्यू में पूरे भारत वर्ष में सबसे अधिक अंक प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।
बचपन से ही मेधावी रहे हैं अक्षत
प्रेम किशोर मिश्रा और माता अर्चना मिश्रा के सुपुत्र अक्षत की शुरुआती शिक्षा घरघोड़ा के सेंट एन्स हाई स्कूल में हुई। वे बचपन से ही अपनी कक्षा में प्रथम स्थान पर आते रहे। उनकी इसी काबिलियत को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें सैनिक स्कूल अंबिकापुर भेजने का फैसला लिया। हालांकि एक मां के लिए अपने जिगर के टुकड़े को खुद से दूर भेजना कठिन था, लेकिन देश सेवा के जज्बे के आगे ममता ने भी इस कठिन फैसले को स्वीकार किया। अक्षत ने भी अपने पिता के सपने को अपना लक्ष्य बना लिया और सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षा में पूरे प्रदेश में नौवां स्थान हासिल कर वहां दाखिला लिया।
कड़े अनुशासन और त्याग से मिली सफलता
सैनिक स्कूल में 6वीं से 12वीं तक की पढ़ाई के दौरान अक्षत ने खुद को एक कुशल छात्र के रूप में निखारा। उन्होंने अपनी दिनचर्या को पूरी तरह अनुशासित रखा। जहां आज के युवा मौज-मस्ती और सोशल मीडिया में समय बिताते हैं, वहीं अक्षत ने खुद को इन सबसे दूर रखा। सुबह 4 बजे उठकर अभ्यास करना और लगातार मेहनत करना उनकी आदत बन गई। उनका एक ही लक्ष्य था कि उन्हें उस वर्दी को हासिल करना है, जिसे पहनकर देश की सेवा की जा सके।
SSB में रचा इतिहास
सेना में अफसर बनने की राह में SSB इंटरव्यू सबसे कठिन पड़ाव माना जाता है। इसमें पांच दिनों तक उम्मीदवार के मनोविज्ञान, शारीरिक क्षमता और नेतृत्व गुणों की बारीकी से जांच की जाती है। अक्षत ने न केवल इस बाधा को पार किया बल्कि पूरे भारत में सबसे ज्यादा अंक लाकर यह साबित कर दिया कि छोटे शहरों के युवाओं में भी आसमान छूने का दम होता है।

युवाओं के लिए रोल मॉडल
अक्षत की इस शानदार उपलब्धि पर उनके बड़े भाई अरुण धर दीवान सहित पूरे परिवार और घरघोड़ा क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनकी सफलता उन हजारों छात्रों के लिए एक मिसाल है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं। अक्षत ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर मन में दृढ़ इच्छाशक्ति हो और कर्म के प्रति ईमानदारी, तो कोई भी मंजिल पाना असंभव नहीं है। अब अक्षत उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनेंगे जहां से देश के महान सैनिक नायक निकले हैं। रायगढ़ का यह लाड़ला अब भारतीय नौसेना में अपनी सेवाएं देकर देश की रक्षा करेगा।
























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