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शिवजी का प्रिय ‘आक’ है जड़ी-बूटियों का राजा: मोटापा और गठिया ही नहीं, गंजापन और बवासीर भी होगा जड़ से खत्म.. जानें इसके दर्जनभर चमत्कारी गुण!

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न्यूज डेस्क। छत्तीसगढ़ की पावन धरा, जहां कदम-कदम पर प्रकृति का आशीर्वाद बिखरा है, वहां ‘आक’ या ‘मदार’ का पौधा सिर्फ एक वनस्पति नहीं बल्कि आस्था का प्रतीक भी है। हमारे प्रदेश के शिव मंदिरों में सावन के महीने में और हर सोमवार को भगवान भोलेनाथ को नीले और सफेद आक के फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस फूल को हम श्रद्धा के साथ महादेव पर चढ़ाते हैं, उसी पौधे का हर हिस्सा जड़ से लेकर दूध तक आयुर्वेद की दुनिया में एक ‘महाऔषधि’ माना गया है? रायगढ़ से लेकर बस्तर तक, छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में आज भी बुजुर्ग जोड़ों के दर्द और पुरानी चोट के लिए इसी मदार का सहारा लेते हैं। इसे ‘वानस्पतिक पारद’ कहा जाता है।

मोटापा, शुगर और गठिया का अचूक समाधान
आज के समय में शुगर और बढ़ता हुआ पेट एक बड़ी समस्या है। इसके लिए आक का पत्ता किसी वरदान से कम नहीं। बस पत्ते को उल्टा (खुरदरा हिस्सा) करके पैर के तलवे से सटा लें और मोजा पहन लें। इसे पूरा दिन रहने दें और रात को निकाल दें; जानकारों का दावा है कि एक सप्ताह में शुगर लेवल सामान्य होने लगता है और पेट की चर्बी भी कम होती है। वहीं, गठिया के पुराने दर्द के लिए इसकी जड़ का प्रयोग प्रसिद्ध है। जड़ को पानी में पकाकर, उस पानी से तैयार गेहूं की रोटियां घी-गुड़ के साथ 21 दिन तक खाने से सालों पुराना जोड़ों का दर्द शरीर छोड़ देता है।

कान का बहरापन और दांतों के दर्द में राहत
अक्सर लोग दांतों के हिलने और दर्द से परेशान रहते हैं। ऐसे में हिलते हुए दांत की जड़ में एक-दो बूंद आक का दूध लगाने से वह बिना किसी तकलीफ के आसानी से निकल जाता है। वहीं, अगर कोई बहरेपन की समस्या से जूझ रहा है, तो आक के पत्तों पर घी लगाकर उसे आग में गर्म करें और उसका रस निचोड़ लें। इस रस को हल्का गुनगुना करके रोजाना कान में डालने से बहरापन ठीक होने लगता है।

बवासीर और चर्म रोगों का काल
बवासीर के मरीजों के लिए आक के पत्तों का धुआं और इसके दूध का लेप मस्सों को सुखाने में मदद करता है। एक विशेष विधि में इसके पत्तों को पांचों नमक, तिल के तेल और नींबू रस के साथ पकाकर तैयार किया गया चूर्ण बादी बवासीर को जड़ से नष्ट कर देता है। त्वचा की समस्याओं जैसे दाद, खाज और एक्जिमा के लिए आक के दूध को हल्दी के साथ या पत्तों को सरसों के तेल में जलाकर लगाने से चमत्कारी लाभ मिलता है। चेहरे की चमक बढ़ाने और कील-मुहासों को दूर करने में भी इसका दूध और हल्दी का मेल बहुत प्रभावी है।

उड़े हुए बाल और अन्य स्वास्थ्य लाभ
जिन लोगों के सिर के बाल झड़ गए हैं या पैच बन गए हैं, वहां आक का दूध लगाने से नए बाल उगने लगते हैं। इसके अलावा, पुरानी खांसी होने पर जड़ के चूर्ण में काली मिर्च मिलाकर छोटी गोलियां बनाकर खाने से राहत मिलती है। शीत ज्वर (बुखार) में जड़ को गुड़ के साथ लेना फायदेमंद है। शरीर की किसी भी सूजन या चोट पर इसके पत्तों को गर्म करके बांधने से तुरंत आराम मिलता है।

सावधानी है जरूरी: ‘अमृत’ भी है और ‘विष’ भी
एक पत्रकार के तौर पर हमारा कर्तव्य है कि हम इसके दूसरे पहलू से भी आपको अवगत कराएं। जैसा कि हमारे पूर्वज कहते आए हैं, आक का पौधा ‘जहरीला’ भी होता है। इसका दूध अगर आंखों में चला जाए तो दृष्टि को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, इसका कोई भी प्रयोग करने से पहले स्थानीय वैद्य या विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें।
भगवान शिव को प्रिय यह पौधा जितना आध्यात्मिक महत्व रखता है, उतना ही यह हमारी सेहत के लिए भी अनमोल है। बस जरूरत है तो सही जानकारी और सावधानी की।

  • डिस्क्लेमर: लेख के अंत में यह जरूर लिखें: “यह जानकारी लोक मान्यताओं और आयुर्वेद के विभिन्न प्रकाशित आर्टिकल्स पर आधारित है। केलो प्रवाह इसकी पुष्टि नहीं करता, कृपया विशेषज्ञ की सलाह लें।”

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विकास पाण्डेय

न्यूज एडिटर

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला मुख्यालय से वर्ष 1988 से निरंतर प्रकाशित हो रहे प्रतिष्ठित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' के 'Digital Wing' में News Editor की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। Finance (NBFC) क्षेत्र के 15 वर्षों के अनुभव के बाद इन्होंने 'RIG24 Media Network' से Journalism की शुरुआत की और कार्य के दौरान ही 'BJMC' की Professional Degree प्राप्त की। ​विकास अक्टूबर 2021 से 'केलो प्रवाह' के Web News Portal और Social Media Platforms का संचालन एवं संपादन कर रहे हैं। ये विशेष रूप से क्षेत्रीय घटनाक्रम, Exclusive रिपोर्ट्स, सीएम की गतिविधियों और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ-साथ Agriculture, Politics, Finance, Infrastructure, Development, Employment, Sports, Career, Current Affairs, सामाजिक, देश-प्रदेश और शासन-प्रशासन से संबंधित कई विषयों पर निरंतर लेखन कर रहे हैं, जो पाठकों की जरूरत के अनुसार उपयोगी हों।

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