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पहाड़ों से भी ऊंचा सेवा का जज्बा: महतारी वंदन योजना के लिए दुर्गम पहाड़ों पर पैदल चलीं शांति सोनवानी, 47 कोरवा महिलाओं का कराया E-Kyc

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रायगढ़, 08 जून 2026। शासन की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना का लाभ प्रत्येक पात्र महिला तक पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन लगातार प्रयासरत है। इन प्रयासों को सफल बनाने में मैदानी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों की भूमिका भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसका एक प्रेरणादायी उदाहरण एकीकृत बाल विकास परियोजना कापू के अंतर्गत आने वाले बरघाट आंगनबाड़ी केन्द्र में देखने को मिला, जहां आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती शांति सोनवानी ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद असाधारण समर्पण का परिचय देते हुए सभी पात्र महिलाओं का ई-केवाईसी पूर्ण कराया।

जिला मुख्यालय रायगढ़ से लगभग 120 किलोमीटर दूर स्थित कापू परियोजना क्षेत्र के बरघाट गांव तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। यह गांव ग्राम पंचायत कुमरता से लगभग तीन किलोमीटर दूर पहाड़ी के ऊपर स्थित है। गांव तक पहुंचने के लिए पथरीले, ऊबड़-खाबड़ और जंगलों से होकर गुजरने वाले कठिन मार्गों से यात्रा करनी पड़ती है। बावजूद इसके, श्रीमती शांति सोनवानी ने हार नहीं मानी और शासन की योजना को अंतिम छोर तक पहुंचाने का संकल्प लेकर लगातार प्रयास करती रहीं।

बरघाट गांव विशेष पिछड़ी जनजाति कोरवा समुदाय का निवास क्षेत्र है। यहां रहने वाले अधिकांश परिवार आज भी सीमित संसाधनों और पारंपरिक जीवनशैली के बीच जीवन-यापन करते हैं। तकनीकी जानकारी और डिजिटल सेवाओं तक सीमित पहुंच होने के कारण सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। महतारी वंदन योजना के हितग्राहियों का शत-प्रतिशत ई-केवाईसी सुनिश्चित करने के निर्देश मिलने के बाद बरघाट क्षेत्र की 49 महिलाओं का ई-केवाईसी कराना एक बड़ी चुनौती थी। यदि समय पर ई-केवाईसी नहीं होता, तो महिलाओं को योजना की आर्थिक सहायता प्राप्त करने में परेशानी हो सकती थी।

स्वयं कोरवा जनजाति समुदाय से जुड़ी श्रीमती शांति सोनवानी ने महिलाओं के बीच पहुंचकर उन्हें योजना के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। उन्होंने बताया कि ई-केवाईसी पूर्ण होने से उन्हें शासन द्वारा मिलने वाली सहायता राशि नियमित रूप से प्राप्त होती रहेगी। प्रारंभ में कई महिलाएं तकनीकी प्रक्रिया और लंबी दूरी तय करने को लेकर हिचकिचा रही थीं, लेकिन शांति सोनवानी ने धैर्य और संवेदनशीलता के साथ उनका विश्वास जीता। महिलाओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए श्रीमती शांति सोनवानी ने स्वयं हितग्राहियों को समूह बनाकर पहाड़ी रास्तों से ग्राम पंचायत कुमरता स्थित कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) तक पहुंचाने की व्यवस्था की।

कई अवसरों पर उन्हें सुबह से शाम तक पैदल चलकर महिलाओं को केन्द्र तक लाना पड़ा। कठिन चढ़ाई, जंगलों से गुजरने वाले रास्ते और परिवहन सुविधाओं के अभाव जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने प्रयासों में कोई कमी नहीं आने दी।
उनकी अथक मेहनत और समर्पण का परिणाम यह रहा कि क्षेत्र की 49 में से सभी 47 महिलाओं का सफलतापूर्वक ई-केवाईसी पूर्ण कराया गया। इससे इन सभी हितग्राहियों को महतारी वंदन योजना का लाभ बिना किसी बाधा के प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त हुआ। ग्रामीण महिलाओं ने श्रीमती शांति सोनवानी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग और मार्गदर्शन के बिना ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर पाना संभव नहीं था।

महिलाओं ने बताया कि उन्होंने न केवल पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया, बल्कि हर कदम पर उनके साथ रहकर सहायता भी प्रदान की। एकीकृत बाल विकास परियोजना कापू के अधिकारियों ने भी उनके कार्य की सराहना करते हुए कहा कि श्रीमती शांति सोनवानी ने अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण, जनसेवा की भावना और सामाजिक उत्तरदायित्व का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उनका यह प्रयास न केवल अन्य आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणास्रोत है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और सेवा भाव के बल पर दुर्गम से दुर्गम क्षेत्रों में भी शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जा सकता है।

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