रायगढ़। मरणोपरांत देहदान और अंगदान का संकल्प लेने वाले विरले ही लोग होते हैं। समाज में इस तरह की सोच रखने वालों ने एक नई वैचारिक, सामाजिक क्रांति शुरू की है। इसमें अब रायगढ़ के 6वीं बटालियन में आरक्षक के रूप में पदस्थ सोहनलाल साहू का नाम भी जुड़ गया है। सोहन और उनकी पत्नी ने मृत्यु उपरांत अपना देहदान और अंगदान का संकल्प लिया है। देहदान को स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में बेहद अहम माना जाता है। चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में इससे बहुत लाभ मिलता है। इससे नई रिसर्च को भी बढ़ावा मिलता है। अंगदान से कई बीमार मरीजों को नवजीवन मिलता है।
रायगढ़ जिले में बेहद कम लोग देहदान और अंगदान संकल्प से जुड़े हैं। अब इस पुण्य कार्य में 6वीं बटालियन के सोहन लाल साहू और उनकी पत्नी रुकमणि साहू भी जुड़ गई हैं। वे रायगढ़ में आरक्षक चालक के पद पर पदस्थ हैं। लंबे समय से देश की सेवा कर रहे सोहन ने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए मरणोपरांत अपना अंग व शरीर दान करने का फैसला लिया है। इस फैसले में उनकी पत्नी रुकमणि भी साथ हैं। अब दोनों का उद्देश्य समाज को प्रेरित करने का है। दोनों अब तक 12 से 15 लोगों को अंग व देहदान के लिए प्रेरित कर चुके हैं। सोहन लाल साहू ने जरूरतमंद लोगों को 14 बार रक्तदान किया है।
इसके अलावा सामाजिक कुप्रथा मृत्यु भोज न कर उस राशि को जनहित कार्य में लगाने फैसला किया है। सोहन लाल साहू की पत्नी रुकमणि साहू ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र भी लिखा है। रुकमणि का कहना है कि दूसरे राज्यों में देहदान और अंगदान संकल्प लेने वालों को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाती है। लेकिन छग में केवल प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाता है। समाज में जागरूकता लाने के लिए यह पर्याप्त नहीं है। मुख्यमंत्री ने उनके पत्र पर चिकित्सा शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्यवाही करने को कहा है।





















