- कोल कंट्रोलर्स ऑर्गनाइजेशन के पर कतरे, रायगढ़ की दो खदानों की रिपोर्ट में मिली खामियां
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। कोयला घोटाले के बाद 2015 से प्रारंभ हुए कोल ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना था। नीलामी प्रक्रिया को लेकर जब-तब सवाल उठे हैं। अब रायगढ़ की दो कोयला खदानों की जियोलॉजिकल रिपोर्ट ने तूल पकड़ लिया है। दरअसल, इसके पीछे केंद्र सरकार का रिफॉर्म है, जिसमें प्राइवेट एजेंसियों को जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करने का अधिकार दे दिया गया जिसकी समीक्षा करने वाली कमेटी ही भंग कर दी गई। यह मामला बहुत उलझा हुआ है। कोयला मंत्रालय की कोल कंट्रोलर्स ऑर्गनाइजेशन को कोल ब्लॉक के सर्वे और जियोलॉजिकल रिपोर्ट की समीक्षा करने का अधिकार था। कोई भी खदान प्रारंभ करने के पूर्व सीसीओ की मंजूरी अनिवार्य थी जो अब नहीं है।
मंत्रालय ने उस कमेटी को भी भंग कर दिया है जो जियोलॉजिक रिपोर्ट की व्याख्या और अनुमति जारी करती थी। खदान में कोयला भंडार का सही अनुमान लगाने का काम भी इसी कमेटी के पास था। नए नियमों के तहत प्राईवेट कंपनियों को भी जियोलॉजिकल रिपोर्ट को एप्रूव करने का अधिकार दे दिया गया। पहले एक्सपर्ट कमेटी ही रिपोर्ट को एप्रूव करती थी जो अब नहीं है। नए प्रावधानों को लेकर बहस छिड़ गई है। बताया जा रहा है कि यह सब दिग्गज प्राईवेट कंपनियों को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। एक रिपोर्ट भी सामने आई है जिसमें रायगढ़ की दो कोयला खदानों को लेकर गंभीर टिप्पणी की गई है।
नए नियम लागू होने के पहले एक्सपर्ट कमेटी ने रायगढ़ की दो माइंस बर्रा और पुरुंगा के रिपोर्ट की समीक्षा की थी। जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करने वाली प्राइवेट एजेंसियों ने गलत तथ्यों की एंट्री की थी। पहले एक्सपर्ट कमेटी के रिव्यू में गलतियां पकड़ में आ जाती थी जो अब नहीं होगा। अब कंपनी जो रिपोर्ट जमा करेगी, वह पास हो जाएगा। इन दोनों कोयला खदानों के कोयला भंडार को ही कम कर दिया गया था। जिसका असर राजस्व पर पड़ता। मंत्रालय ने 18 प्राइवेट एजेंसियों को जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करने के लिए अधिकृत किया है जिसमें से कुछ तो कई उद्योग समूहों की शाखाएं हैं।
बर्रा की रिपोर्ट बनाई माहेश्वरी माइनिंग ने
वेदांता लिमिटेड को आवंटित बर्रा कोल ब्लॉक की जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करने के लिए माहेश्वरी माइनिंग प्रालि को काम दिया गया। कंपनी ने रिपोर्ट दी जिसको एक्सपर्ट कमेटी ने रिव्यू किया। इसमें कोयला भंडार को 5603 मिलियन टन बताया गया जबकि वास्तविक भंडार 5724 मिलियन टन था। करीब 121 मिलियन टन कम कोयला भंडार दिखाया गया। कुछ और गलतियां भी पकड़ी गईं।
जीएसआई और एनएलसी ने दी वास्तविक जानकारी
इसी तरह पुरुंगा कोल ब्लॉक को लेकर भी हुआ। इस कोल ब्लॉक का आवंटन अंबुजा सीमेंट को हुआ है जो अडाणी ग्रुप का ही हिस्सा है।
कोल ब्लॉक का जियोलॉजिकल रिपोर्ट तैयार करने का जिम्मा माइनिंग टेक कंसल्टेंसी प्रालि को दिया था जो अडाणी ग्रुप की ही है। माइनिंग टेक की रिपोर्ट पर जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और एनएलसी इंडिया ने टिप्पणियां कीं। एक्सपर्ट कमेटी ने पाया कि ग्रेड को लेकर गलत तथ्य प्रस्तुत किए गए थे। एक ही सीम में कोयले के ग्रेड्स में जमीन-आसमान का अंतर था। एनएलसी ने कई तकनीकी त्रुटियां रिपोर्ट में पाईं जिन्हें रिपोर्ट किया गया।






















