- डूमरनारा की तरह कई मामले, विशेष पिछड़ी जनजाति समूह की जमीनें खतरे में
रायगढ़। आदिवासियों की जमीनें धोखे से गैर आदिवासियों के नाम करने के मामले में रायगढ़ सबसे आगे है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने इसकी रिपोर्टिंग उच्च अधिकारियों को करने के बजाय भूमाफियाओं का साथ देना बेहतर समझा। कापू तहसील के डूमरनारा में पंडो जनजाति की महिला की जमीन अब गैर आदिवासी के नाम हो चुकी है। इस मामले में जांच की तैयारी है। विशेष पिछड़ी जनजातियों का पूर्ण संरक्षण तभी हो सकता है, जब उनके नाम पर दर्ज संपत्तियां उन्हीं की रहें या सरकार को लौटा दी जाएं।
जमीन दलालों ने बेहद आसानी से ऐसी जमीनें चुनी हैं जिनके मालिक या तो फौत हो गए हैं या एक-दो व्यक्ति ही जीवित हैं। कापू के डूमरनारा गांव में रुधनी बेवा गिरधारी जाति पंडो के नाम पर खसरा नंबर 409 रकबा 2.104 हे. भूमि थी। आदिवासी महिला की भूमि सुखन पिता बजरंग निवासी बकालो ने खरीदी। इस अंतरण का रिकॉर्ड जांच में सामने आएगा। इसके बाद 21 फरवरी 2024 को रायपुर की संतोष देवी गुप्ता पति मनोज गुप्ता निवासी अवंति विहार ने जमीन खरीद ली। कलेक्टर की अनुमति के बिना ही पंडो महिला की जमीन दो बार बिक गई।
डूमरनारा की खनं 438/1 रकबा 0.635 हे. की भी रजिस्ट्री हुई है। यह केवल एक ही मामला नहीं है। धरमजयगढ़ अनुविभाग में ऐसे बेनामी खरीदी के सैकड़ों मामले निकलेंगे। जिला मुख्यालय से दूर होने की वजह से यहां आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार की आवाज हुक्मरानों तक नहीं पहुंचती। इस रजिस्ट्री के बाद 25 फरवरी को तत्कालीन नायब तहसीलदार कापू उज्ज्वल पांडेय ने नोटिस दिया। नामांतरण आदेश तहसीलदार एनके सिन्हा ने दिया।
जमकर हो रही बेनामी खरीदी
धरमजयगढ़ में हो रही रजिस्ट्रियां बेहद संदिग्ध हैं। कई कंपनियां और कारोबारी धरमजयगढ़ में निवेश कर रहे हैं। यहां आने वाले दिनों में कई कोयला खदानें भी खुलने जा रही हैं। इसी को देखते हुए बेनामी रजिस्ट्रियां हो रही हैं। कंपनियां अपने ही मुलाजिम या परिचितों के नाम पर खरीदी कर रही हैं। ऐसे कुछ और रजिस्ट्रियों के दस्तावेज सामने आए हैं, जिनका खुलासा किया जाएगा।























