रायगढ़। नगर निगम में डेंगू को लेकर हुई बैठक राजनीतिक अखाड़ा बन कर रह गई। शहर सरकार ने जहां नगर निगम आयुक्त पर ठीकरा फोड़ते हुए महापौर व पार्षदों को बिना विश्वास में लिये मनमानी काम करने का आरोप लगाया तो वहीं भाजपा पार्षदों ने शहर सरकार को घेरा। डेंगू से बचाव को लेकर निगम प्रशासन के पास कोई कारगर योजना नहीं है ओर न ही इस विषय पर कोई गंभीर नजर आ रहा है। जागरूकता अभियान के नाम पर केवल औपचारिकता मात्र निभाई जा रही है। शहर में तेजी से पांव पसार रहे डेंगू को लेकर नगर निगम में शुक्रवार को बैठक रखी गई थी।
बैठक शुरू होते ही डेंगू से बचाव के उपाय पर चर्चा के बजााए आरोप प्रत्यारोप शुरू हो गया। बैठक में उपस्थित शहर सरकार के एमआईसी सदस्य आयुक्त सुनील चन्द्रवंशी पर ठीकरा फोड़ते हुए उन पर इस बात का आरोप लगाया कि नगर निगम के कार्यों में आयुक्त जनप्रतिनिधियों को बिना विश्वास में लिये मनमानी काम कर रहे हैं। यदि डेंगू को लेकर निगम प्रशासन ने किसी प्रकार का खाका तैयार किया है तो उसे सबके सामने लायेंं। वहीं कांग्रेस पार्षदों ने सवालों की झड़ी लगाते हुए आयुक्त से पुछा कि सफाई दरोगा को जिन वार्डों का प्रभार दिया गया था उनमें डेंगू के फैलने पर सफाई दरोगा पर क्या कार्रवाई की गई।
उनका कहना था कि शहर की जनता पार्षदों से सवाल करेंगी न कि किसी अधिकारी से इसलिए पार्षदों को विश्वास में लेकर काम किया जाना चाहिए। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद सलीम नियारिया ने सुझाव दिया कि पूर्व में डेंगू का प्रभाव अत्यधिक बढ़ने पर जिला प्रशासन एवं नगर निगम की टीम ने संयुक्त रूप से मिलकर कार्य किया था जिसमें प्रशासन ने डीएमएफ फंड से 20 कर्मचारी व बड़ी फागिंग मशीन नगर निगम को उपलब्ध कराई थी। लार्वा को समाप्त करने पूरे शहर में लगातार फागिंग की गई थी।
इसी प्रकार इस बार भी करने की जरूरत है। वहीं भाजपा पार्षदों ने शहर सरकार को घेरने का प्रयास किया तथा शहर सरकार की लचर व्यवस्था पर सवाल उठाये। कुल मिला कर बैठक आरोप प्रत्यारोप के बीच समाप्त हो गई और मुख्य समस्या डेंगू के बचाव के लिए कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका।























