कोरबा, 26 अक्टूबर। करतला वन परिक्षेत्र के काशीपानी जंगल में 9 हाथियों के झुंड में नन्हे शावक के जन्म पर आसपास के 7 गांवों के ग्रामीणों ने पारंपरिक तरीके से उसकी छठी मनाई। ग्रामीणों ने नवजात हाथी का नामकरण करते हुए उसका नाम ‘काशी’ रखा है।
यह अनूठा आयोजन कारीपानी मंदिर के नीचे स्थित गौठान टिकरापारा में आयोजित किया गया। इसमें काशीपानी सहित रामभाठा, लबेद, पाहराभांठा, छातापाठ, जामपानी और छुईडुंगा गांव के ग्रामीण बड़ी संख्या में एकत्रित हुए। ग्रामीणों ने मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और विधिवत पूजा-अर्चना की, जिसके बाद भोजन प्रसादी का वितरण किया गया।
वन विभाग की समझाइश: हाथियों से दूरी बनाए रखें ग्रामीण
इस अवसर पर वन विभाग के एसडीओ मणिकांत वर्मा ने ग्रामीणों से अपील की कि वे हाथियों से छेड़छाड़ न करें और उनसे सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। उन्होंने बताया कि नवजात शावक समेत 9 हाथियों का यह दल फिलहाल काशीपानी के जंगल में ही विचरण कर रहा है। इसके अलावा कुदमुरा क्षेत्र में 32 और चचिया इलाके में 7 हाथी मौजूद हैं। क्षेत्र में हाथियों ने 17 किसानों की फसलों को नुकसान भी पहुंचाया है।
जिले में हाथियों की आमद और छठी मनाने की परंपरा
कोरबा जिले में हाथियों का पहला दल वर्ष 2000 में कुदमुरा के आमटिकरा क्षेत्र में पहुंचा था। वर्तमान समय में जिले में हाथियों की संख्या कई बार 150 तक पहुंच जाती है। हाथियों के नवजात बच्चों की छठी मनाने और उनके नामकरण की यह परंपरा पहले धिनारा गांव से शुरू हुई थी, जिसे अब क्षेत्र के अन्य ग्रामीण भी अपना रहे हैं।























