रायगढ़। जिले की शेष 268 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त बनाने के लिए प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत आगामी 27 नवंबर को विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जिनमें संबंधित पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित करने का प्रस्ताव पारित कराया जाएगा। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के निर्देश पर जिला पंचायत के सभाकक्ष में बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों के लिए जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें कानूनी प्रावधानों और कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि 27 नवंबर को होने वाली विशेष ग्राम सभाओं में बाल विवाह मुक्त ग्राम पंचायत का प्रस्ताव अनिवार्य रूप से रखा जाए और उसे नियमानुसार पारित कराया जाए। उन्होंने अभियान को सफल बनाने के लिए सभी विभागों और अधिकारियों को आपसी समन्वय से काम करने को कहा।
अब तक 282 पंचायतें घोषित, 60 प्रतिशत का रखा गया लक्ष्य
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी अरुण कुमार पाण्डेय ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले की 282 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। अब बची हुई 268 ग्राम पंचायतों को भी इस कुरीति से मुक्त कराने की तैयारी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान जिले की कुल 60 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन पंचायतों को पहले मुक्त घोषित किया जा चुका है, वहां भी दोबारा ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए लगातार निगरानी रखी जाएगी। कार्यशाला के दौरान ‘हर घर मुनगा, घर-घर मुनगा’ अभियान को लेकर भी प्रशिक्षण दिया गया।
पंचायतों में विवाह पंजी का होगा संधारण, तय की गईं जिम्मेदारियां
जिला बाल संरक्षण अधिकारी धीरेंद्र कुमार शर्मा ने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कानून के तहत पंचायत स्तर पर पंचायत सचिव, सेक्टर स्तर पर पर्यवेक्षक, परियोजना स्तर पर परियोजना अधिकारी और जिला स्तर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी को बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारी का दायित्व सौंपा गया है।
प्रक्रिया के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर विवाह पंजी संधारित की जाएगी। ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और नगरीय निकायों से प्रस्ताव पारित होने के बाद दावा-आपत्ति प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद अनुशंसा सहित प्रस्ताव जिला स्तर पर भेजा जाएगा, जहां अंतिम दावा-आपत्ति प्रकाशन की प्रक्रिया पूरी कर पंचायतों को विधिवत बाल विवाह मुक्त घोषित किया जाएगा।
हेल्पलाइन नंबर 1098 पर सूचना देने की अपील
प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि बाल विवाह की जानकारी या आशंका होने पर तुरंत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, सरपंच, सचिव या चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 पर संपर्क करें। कार्यशाला के समापन पर जिला बाल संरक्षण इकाई, चाइल्ड हेल्पलाइन, परियोजना अधिकारियों और पर्यवेक्षकों सहित उपस्थित 120 अधिकारियों-कर्मचारियों को बाल विवाह रोकने के लिए निष्ठापूर्वक कार्य करने की सामूहिक शपथ दिलाई गई।























