- रायगढ़ से सरायपाली के बन रहा नेशनल हाईवे, महानदी पर बनेगा उच्च स्तरीय पुल
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। रायगढ़ से सरायपाली तक बन रही टूलेन एनएच 153 का काम कब पूरा होगा, पता नहीं। अब चंद्रपुर बायपास के लिए तीसरी बार टेंडर लगा है। करीब 75 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति दी गई है। भ्रष्टाचार के कारण सडक़ दस साल में भी पूरी नहीं हो सकी है। करीब 86 किमी लंबे इस प्रोजेक्ट का ठेका एरा इंफ्रा ने लिया था। लेकिन कंपनी दिवालिया हुई तो काम भी अटक गया। ठेका सबलेट किया गया लेकिन नई कंपनी जेएस ग्रोवर कंस्ट्रक्शन भी काम पूरा नहीं कर सकी और भाग गई। 328 करोड़ में पूरे रोड का टेंडर दिया गया था। रोड निर्माण में कई तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें देखने के बावजूद पेमेंट किया जाता रहा। इस एनएच में बैलेंस वर्क को पूरा करने के लिए सडक़, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने वर्ष 24-25 में करीब 261 करोड़ की मंजूरी दी थी।
रायगढ़ से दानसरा के बीच 45 किमी रोड के लिए 163 करोड़, चंद्रपुर बायपास 6 किमी रोड और पुल निर्माण के लिए 98 करोड़ और गोमर्डा अभ्यारण्य से लेकर सरायपाली तक 96 करोड़ की मंजूरी मिल चुकी है। इसको भी दो साल बीत चुके हैं। गोमर्डा से सरायपाली की तरफ तो काम अंतिम चरण में है। रायगढ़ से दानसरा के बीच का इस्टीमेट बनाया जाना है। बीच में चंद्रपुर बायपास के लिए दो बार टेंडर में ठेकेदार पात्र नहीं हुए। तीसरे टेंडर में चार कंपनियों ने बिड डाली है। करीब 73.75 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति दी गई है। महानदी पर पुल का भी निर्माण होना है, जो पानी भरा होने के कारण पूरा करना कठिन है। इसलिए ठेकेदार परेशान होंगे। हैरानी की बात यह है कि बचे काम के लिए ही करीब 350 करोड़ रुपए खर्च होंगे जबकि कंप्लीट टेंडर ही 328 करोड़ का था।
डेढ़ साल पहले नाराज हुए थे सीएम
इस रोड पर एक बार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को कार से आना पड़ा था। मौसम खराब होने के कारण उनका हेलीकॉप्टर नहीं उड़ सका था। कनकबीरा और रायगढ़ के समाधान शिविर में शामिल होने के लिए वे कनकबीरा, दानसरा, चंद्रपुर होते हुए रायगढ़ पहुंचे थे। तब उन्होंने एनएच को लेकर टिप्पणी की थी। रोड जगह-जगह टूटकर उखड़ चुकी है। कांक्रीट में दरारें हैं। इसी रोड से आम जनता कई सालों से सफर कर रही है।






















