शादी के बाद मायके से नाता खत्म नहीं होता, 4 हफ्ते में नौकरी देने का आदेश…
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर एक बेहद अहम और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि शादी हो जाने से किसी बेटी या बहन का अपने मायके से रिश्ता खत्म नहीं होता। अविवाहित सरकारी कर्मचारी की असमय मौत के बाद उसकी शादीशुदा बहन भी अनुकंपा नियुक्ति पाने की पूरी हकदार है। हाईकोर्ट के जस्टिस संजय के. अग्रवाल की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार के 19 सितंबर 2019 के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक शादीशुदा बहन का आवेदन खारिज कर दिया गया था।
कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि 4 हफ्ते के भीतर याचिकाकर्ता को नियमों के तहत नौकरी देने का सकारात्मक आदेश जारी किया जाए। पूरा मामला जांजगीर-चांपा और बिलासपुर से जुड़ा है। नेहरू नगर बिलासपुर के रहने वाले दुर्गेश मिश्रा जांजगीर-चांपा में जिला लोक अभियोजन अधिकारी के पद पर पदस्थ थे। 13 जून 2018 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया। दुर्गेश अविवाहित थे। उनकी मौत के बाद उनकी बुजुर्ग मां तारा मिश्रा ने अनुकंपा नीति के तहत अपनी बेटी और मृतक की बहन अमिता दुबे के लिए अनुकंपा नियुक्ति का आवेदन दिया था।
राज्य सरकार के गृह एवं सामान्य प्रशासन विभाग ने यह कहते हुए आवेदन निरस्त कर दिया था कि नीति में विवाहित बहन को अनुकंपा नौकरी देने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। इसके खिलाफ पीड़िता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में बताया गया कि केवल शादी होने से बहन का अपने मूल परिवार से नाता खत्म नहीं होता। जब विवाहित भाई को अलग नहीं माना जाता, तो बहन के साथ यह भेदभाव संविधान के अनुच्छेद 14 और 15(1) का उल्लंघन है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया। कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति का मुख्य उद्देश्य संकटग्रस्त परिवार को तुरंत वित्तीय राहत पहुंचाना है। समाज में कई शादीशुदा बेटियां और बहनें अपने परिवार का सहारा बनती हैं। केवल लैंगिक पूर्वाग्रह या वैवाहिक स्थिति के आधार पर किसी महिला को उसके संवैधानिक अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता।























