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धान के बदले मक्का की खेती बनी फायदे का सौदा

CultivatingMaizeInsteadofPaddy
  • किसानों से 5 करोड़ रुपए से अधिक का मक्का खरीदा गया
  • 605 किसानों ने 1763 एकड़ में की पॉपकॉर्न मक्का की खेती
  • अनुबंध खेती से बढ़ी आय और मिला मार्केट

रायपुर, 04 जून 2026। फसल विविधीकरण को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि और भूमि की उर्वरता में सुधार हो रहा है। पारंपरिक फसलों से हटकर नई और उच्च-मूल्य वाली फसलें उगाने से किसानों को बाजार में बेहतर मूल्य मिलता है और जोखिम कम होता है। धान के बदले मक्का की खेती अपनाना फसल विविधीकरण की दिशा में एक बेहतरीन और अत्यधिक लाभदायक कदम है। इससे न केवल भूमि की उर्वरता और जल स्तर में सुधार होता है, बल्कि किसानों की आय में भी वृद्धि होती है।

किसानों को बेहतरीन आर्थिक लाभ

राजनांदगांव जिले में फसल चक्र परिवर्तन के तहत ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर मक्के की खेती अपनाने वाले किसानों को बेहतरीन आर्थिक लाभ प्राप्त हो रहा है। गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी के साथ अनुबंध खेती करने वाले किसानों ने उत्पादन एवं आय के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। कंपनी द्वारा जिले के किसानों से 5 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का पॉपकॉर्न मक्का खरीदा गया है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है।

1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मक्का की खरीदी

रबी वर्ष 2025-26 में गौरमेड पॉपकॉर्न कंपनी द्वारा जिले के 605 किसानों के साथ अनुबंध कर कुल 1763 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कराई गई। किसानों को औसतन 19.33 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हुआ। कंपनी ने 1700 रुपए प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करते हुए 5 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का मक्का खरीदा। इसमें से अब तक 3.73 करोड़ रुपए का भुगतान किसानों को किया जा चुका है तथा शेष भुगतान की प्रक्रिया निरंतर जारी है।

सर्वाधिक क्षेत्र में मक्का उत्पादन करने का गौरव ललित कुमार को

छुरिया विकासखंड के ग्राम भरीटोला के किसान ललित कुमार साहू ने 23.56 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर जिले में सर्वाधिक क्षेत्र में मक्का उत्पादन करने का गौरव प्राप्त किया। उन्हें इस खेती से 6 लाख 95 हजार रुपए से अधिक की आय हुई।
इसी प्रकार राजनांदगांव विकासखंड के किसान वेद प्रकाश चंद्राकर ने 9.5 एकड़ क्षेत्र में पॉपकॉर्न मक्का की खेती कर 32.66 क्विंटल प्रति एकड़ का उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त किया। उन्हें इस खेती से 5 लाख 27 हजार रुपए से अधिक की आय हुई। वहीं ग्राम जमलेश्वर के किसान देवराम पटेल ने 35.5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त कर लगभग 4 लाख 67 हजार रुपए की आमदनी अर्जित की।

फसल विविधीकरण को मिला बढ़ावा

इन किसानों की सफलता अन्य किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन रही है। कृषि विभाग के अनुसार धान के स्थान पर मक्का जैसी वैकल्पिक फसलों को अपनाने से किसानों को अधिक लाभ मिलने के साथ-साथ जल संरक्षण, मिट्टी की उर्वरता तथा फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा मिल रहा है। जिले के किसानों की यह सफलता अन्य किसानों को भी फसल चक्र परिवर्तन अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।

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Editorial

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