केलो प्रवाह खेल डेस्क। भारत और न्यूजीलैंड के बीच 8 मार्च को अहमदाबाद के मैदान पर होने वाला खिताबी मुकाबला अब केवल दो टीमों की जंग नहीं, बल्कि भारतीय टीम मैनेजमेंट के लिए अपनी गलतियों को सुधारने का आखिरी मौका बन गया है। सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 255 रन बनाने के बावजूद जिस तरह भारतीय गेंदबाजों के पसीने छूट गए और मैच आखिरी ओवर तक खिंचा, उसने टीम की तैयारियों की पोल खोल दी है। खबर है कि फाइनल में कीवी चुनौती से निपटने के लिए स्टार स्पिनर वरुण चक्रवर्ती की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर को प्लेइंग-11 में शामिल किया जा सकता है। क्रिकेट गलियारों में यह चर्चा आम है कि टीम इंडिया वरुण चक्रवर्ती को सिर्फ उनकी ‘नंबर-1 रैंकिंग’ के कारण ढो रही है।
पूरे टूर्नामेंट में उनका जादू फीका रहा है और वह विपक्षी बल्लेबाजों पर कोई खास प्रभाव नहीं छोड़ पाए हैं। ऐसे में सूत्रों का दावा है कि कप्तान सूर्यकुमार यादव और हेड कोच गौतम गंभीर अब ‘रैकिंग’ के बजाय ‘इम्पैक्ट’ पर भरोसा करेंगे। वाशिंगटन सुंदर न केवल सधी हुई गेंदबाजी करते हैं, बल्कि नंबर 9 तक बल्लेबाजी को गहराई भी देते हैं। हालांकि, जानकारों का एक धड़ा यह भी कह रहा है कि अगर 7 बल्लेबाज कुछ नहीं कर पाए तो बाकी क्या उखाड़ लेंगे? इसलिए गेंदबाजी को धार देने के लिए कुलदीप यादव जैसे ‘चाइनामैन’ गेंदबाज को भी मौका देने की मांग उठ रही है। बल्लेबाजी की बात करें तो अभिषेक शर्मा का फॉर्म टीम के लिए सिरदर्द बना हुआ है। मैदान पर उनकी जद्दोजहद देखकर ऐसा लग रहा है जैसे वह कोई नौसिखिया बल्लेबाज हों।
लेकिन हेड कोच गौतम गंभीर के मिजाज को देखते हुए लगता है कि वह फाइनल में कोई नया रिस्क नहीं लेंगे। वह अभिषेक को ‘जीरो’ मानकर भी मौका दे सकते हैं, क्योंकि अगर उनका बल्ला चल गया तो भारत की जीत पक्की है। दूसरी ओर, संजू सैमसन ने सही समय पर फॉर्म में वापसी कर टीम की लाज बचाई है, जबकि तिलक वर्मा मिडिल ऑर्डर में अप्रत्याशित रूप से भारत के सबसे बड़े ‘ट्रम्प कार्ड’ साबित हुए हैं। न्यूजीलैंड की चुनौती भारत के लिए हमेशा से एक डरावना सपना रही है। आईसीसी इवेंट्स में उनका रिकॉर्ड भारत पर भारी रहा है और मौजूदा फॉर्म में वे बेहद खतरनाक दिख रहे हैं। जसप्रीत बुमराह और अक्षर पटेल को छोड़ दें तो कोई भी भारतीय गेंदबाज आत्मविश्वास में नजर नहीं आ रहा। यदि 8 मार्च को अहमदाबाद की पिच पर भारतीय स्पिनरों ने अपनी भूमिका नहीं निभाई, तो न्यूजीलैंड को वर्ल्ड चैंपियन बनने से रोकना नामुमकिन होगा। अब सारा दारोमदार इस बात पर है कि क्या टीम इंडिया अपनी ‘रैंकिंग वाली जिद’ छोड़कर सही प्लेइंग-11 के साथ मैदान पर उतरती है या नहीं।
बहरहाल मेरा मानना है कि अगर सुंदर को खिलाया भी जाए, तो क्या वो मिडिल ओवर्स में कीवी बल्लेबाजों को लपेट पाएंगे? मुझे तो डर है कि कहीं सेमीफाइनल वाली गलती फाइनल में भारी न पड़ जाए।























