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34 किसानों का धान नहीं बिका, अब सॉफ्टवेयर खुलने का इंतजार

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  • कोड़ासिया समिति में प्रबंधक की लापरवाही, केशला 100 में 200 क्विंटल सड़े धान की खरीदी, भुगतान रोका

रायगढ़। धान खरीदी में कितनी भी सख्ती रही हो, जिसे जहां मौका मिला उसने खेल किया। कोड़ासिया समिति के पूर्व प्रबंधक प्रहलाद बेहरा ने गड़बड़ी की तो उसको निलंबित कर दिया। उसकी जगह आए त्रिलोचन बेहरा ने भी कमाल कर दिया। 34 किसानों के करीब 3 हजार क्विंटल धान की खरीदी की लेकिन एंट्री नहीं हुई। अब किसान इंतजार में हैं कि कब उनका धान स्वीकार किया जाएगा। लैलूंगा की समितियों को सुधारना बेहद मुश्किल है। एक बाहुबली प्रबंधक को हटाओ तो दूसरा आ जाता है। सहकारिता विभाग भी उन्हीं दो-चार प्रबंधकों के भरोसे ही धान खरीदी कर रहा है। इतनी सख्ती होने के बावजूद कई समितियों में गड़बड़ी की गई। कोड़ासिया मंडी में किसानों का धान समिति में पहुंचा, तौल भी हुआ लेकिन ऑनलाइन एंट्री नहीं की।

29 जनवरी को कोड़ासिया समिति में 50 किसानों का टोकन काटा गया था। इनमें से 48 किसानों ने अपना धान मंडी में तौल करवा कर रखा था। प्रबंधक त्रिलोचन बेहरा ने सिर्फ 14 किसानों का धान खरीदकर पोर्टल में अपलोड करवाया। शेष 34 किसानों से त्रिलोचन ने कहा कि रात 12 बजे तक पोर्टल खुला रहेगा और उनकी एंट्री भी कर दी जाएगी। 34 किसानों का कुल धान 7788 बोरी तकरीबन 3115 क्विंटल है। रात 9 बजे के बाद 34 किसानों की एंट्री ही नहीं हुई। अगले दिन किसानों ने समिति में संपर्क किया तो प्रबंधक गायब हो गए। अधिकारियों ने इसकी सूचना कलेक्टर को दी थी। एसडीएम ने एक पत्र भी लिखा जिसके बाद शासन को सूचना देकर पोर्टल खुलवाने की मांग की गई है।

पोर्टल खुलेगा तो ही होगी एंट्री

कोड़ासिया में प्रबंधक त्रिलोचन बेहरा ने लापरवाही की। इसकी वजह से 34 किसानों का धान अब तक नहीं खरीदा जा सका है। किसानों ने प्रबंधक त्रिलोचन बेहरा पर धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया है। उसने अधिकारियों को भी गुमराह किया। घटना की सूचना जिला नोडल को भी नहीं दी। अगले दिन भी मामला नहीं सुलझाया गया। मौके पर नायब तहसीलदार और खाद्य निरीक्षक उपस्थित थे। जब तक खरीदी की एंट्री पोर्टल में नहीं होगी, तब तक किसानों को भुगतान नहीं होगा।

200 क्विंटल सड़ा धान ले आया त्रिलोचन

त्रिलोचन बेहरा का एक और कारनामा सामने आया है। वह केशला100 समिति के अंतर्गत पंजीकृत किसान है। अंतिम दिन शाम को खरीदी समाप्त होने के चंद मिनट पहले वह करीब 200 क्विंटल धान लेकर समिति में पहुंचा। धान खरीदी के लिए दबाव बनाने लगा। समिति प्रबंधक ने भी बिना धान देखे तौल करवाकर खरीदी कर ली। पोर्टल में एंट्री भी हो गई। अगले दिन जब धान को देखा तो पूरा अमानक मिला। इसके बाद पोर्टल में त्रिलोचन बेहरा से खरीदे धान के भुगतान को होल्ड किया गया है। अब समझ नहीं आ रहा है कि इसमें क्या कार्रवाई करें। इन मामलों में अब तक एफआईआर दर्ज होनी थी लेकिन त्रिलोचन को बचाया जा रहा है।

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Editorial

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