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60 दिन के अंदर हटाना था एनएच किनारे अतिक्रमण, नहीं हुआ पालन

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  • सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल 2026 को दिए थे आदेश, सभी राज्यों के मुख्य सचिवों और एनएचएआई को करनी थी कार्रवाई

रायगढ़ (केलो प्रवाह)। नेशनल हाईवे को चौड़ा करने के प्रोजेक्ट पास हो रहे हैं। नियम है कि एनएच किनारे किसी भी तरह के पक्के निर्माण को अनुमति नहीं दी जाएगी। रायगढ़ शहर से निकल रहे एनएच किनारे धड़ल्ले से निर्माण किए गए। किसी ने मकान बना लिया तो किसी ने शोरूम खड़ा कर लिया। सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल में सभी राज्यों को सख्त आदेश दिए थे। लेकिन कोई कुछ नहीं कर रहा है। नवंबर 2025 में राजस्थान के फलोदी व तेलंगाना के रंगारेड्डी में एनएच पर हुए दो दर्दनाक हादसों पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और अथॉरिटीज को नोटिस जारी किया था।

सीनियर एडवोकेट एएनएस नाडकर्णी को एमीकस क्यूरी नियुक्त किया था। उन्होंने मामले में कई बैठकों और चर्चाओं के बाद कई सुधार करने की रिपोर्ट दी थी। एनएचएआई से भी रिपोर्ट मांगी गई। सभी बिंदुओं पर ध्यान देने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे, जिनका पालन सभी राज्यों को करना था। सबसे अहम टिप्पणी भारी वाहनों और अतिक्रमण को लेकर की गई थी। जस्टिस जेके माहेश्वरी और अतुल एस चंदूरकर की बेंच ने कहा कि अब कोई भी भारी वाहन नेशनल हाईवे के किनारे पार्क नहीं किए जाएंगे। एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू करने से पुलिस अलर्ट होगी और समयबद्ध तस्वीरों के जरिए ई-चालान की कार्रवाई की जाए।

एनएचएआई, पुलिस, परिवहन विभाग को मिलकर क्रियान्वयन करना है। कलेक्टरों को एक एसओपी बनाकर कार्रवाई करनी है। आदेश के 60 दिन के अंदर इसका पालन करना है। प्रत्येक एनएच में एक निरीक्षण टीम बनाई जानी है। अतिक्रमण की पहचान कर उनको सीएनएच एक्ट 2002 की धारा 26 के तहत नोटिस दिया जाना है। एनएचएआई को अपने मॉड्यूल राजमार्गयात्रा को शुरू करना होगा, जिसमें कोई भी अतिक्रमण की शिकायत कर सकेगा। वर्ष में कम से कम दो बार ड्रोन से एरियल सर्वे करना है। एनएच की सीमा में कोई भी नया या पुराना अवैध निर्माण या अतिक्रमण हो, 60 दिन के अंदर कलेक्टर को इसे तोडऩा होगा।

इस आदेश का कोई पालन रायगढ़ में नहीं किया गया है। एनएच 49 खरसिया से रेंगालपाली और एनएच 153 रायगढ़ से सारंगढ़ में सैकड़ों लोगों ने अनधिकृत निर्माण किए हैं। एनएच की सीमा में पक्के निर्माण कर लिए गए हैं। इन पर कार्रवाई करने के बजाय टास्क फोर्स बेबस नजर आ रही है।

छातामुड़ा, रेंगालापाली, चपले तक दर्जनों भवन रोड पर

सुको के आदेश पर राज्यों को 60 दिन के अंदर अधिसूचना जारी करनी थी, जिसमें एनएच के बीच से 40 मीटर के दायरे में भूमि के आवासीय उपयोग और 75 मीटर तक कमर्शियल यूज पर प्रतिबंध होगा। मतलब कम से कम 40 मीटर तक कोई भी पक्का निर्माण नहीं होना चाहिए। एनएच 49 में खरसिया से रेंगालपाली के बीच, एनएच 153 में छातामुड़ा, ग्राम सहदेवपाली तक कई लोगों ने रोड तक निर्माण कर लिए हैं। कई कमर्शियल निर्माण ऐसे हैं जो रोड खत्म होते ही शुरू हो जाते हैं। गढ़उमरिया में गिरनार रूफिंग्स और छातामुड़ा में मेटल हाउस इसके उदाहरण हैं।

किसने किया डायवर्सन, किसने दी निर्माण अनुज्ञा

नगर निगम की सीमा में और बाहर टाउन एंड कंट्री प्लानिंग से मिली अनुज्ञा पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर ऐसे पक्के निर्माणों को किसने अनुमति दी, किसने लेआउट, नक्शा पास किया, किस पटवारी ने प्रतिवेदन दिया, किस अधिकारी ने डायवर्सन किया? जानबूझकर एनएच किनारे निर्माण को अनुमति दी गई। अब कार्रवाई करने का समय आया तो बेबसी झलक रही है। इधर केंद्रीय राजमार्ग मंत्रालय टू लेन को फोरलेन करने का आदेश दे रहा है। टास्क फोर्स के अफसर दो दिन रोड पर निकले और ठेले, ट्रकों को हटाकर वापस दफ्तरों में घुस गए।

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