रायगढ़। धान खरीदी का बोझ अब बढ़ता जा रहा है। 3100 रुपए की दर से 21 क्विंटल धान खरीदने की वजह से प्रदेश की अर्थव्यवस्था डांवाडोल होने लगी है। इसलिए धान खरीदी को सीमित करने का मौखिक आदेश है। छोटे किसानों को एक ही टोकन दिया जाता है। इसलिए बचा रकबा समर्पण करने कहा जा रहा है। अब तक 934 किसान 32 हेक्टेयर रकबा समर्पित कर चुके हैं। पिछले साल धान खरीदी का रकबा एक लाख हेक्टेयर से नीचे उतरा था। इस साल और भी कम करने की कोशिश की जा रही है। कोचियों और बिचौलियों पर कार्रवाई के अलावा अभी से रकबा समर्पण कराया जा रहा है। इस बार जिले में 69 समितियों में करीब 1.17 लाख हे. रकबे का पंजीयन हुआ है।
जबकि वर्ष 24-25 में जिले में 85238 किसानों का 1,27,036 हे. भूमि का पंजीयन हुआ था। इसमें से 98053 हे. में 50,87,976 क्विं. धान खरीदी हुई। अब प्रशासन के आदेश पर पहले छोटे किसानों को टारगेट किया गया है। एक ही टोकन में पूरा धान बेचने को कहा जा रहा है। जितना धान आया, उसकी खरीदी हुई। रकबा शेष रहने पर केंद्र में ही रकबा समर्पण करवाया जा रहा है ताकि रिक्त रकबे पर कोई और धान न बेच सके। अब तक जिले में 934 किसानों ने 32 हे. रकबे का समर्पण किया है। रकबा सरेंडर करने का आंकड़ा अब तेजी से बढ़ेगा क्योंकि बड़े किसानों का टोकन बढ़ेगा। छोटे किसानों से धान खरीदी 20 दिसंबर तक खत्म हो जाएगी। इसके बाद केवल बड़े किसान बचेंगे।
टॉप फाइव में पहुंचा रायगढ़
पिछले साल की खरीदी से इस बार की खरीदी की तुलना हुई तो रायगढ़ का आंकड़ा तीन गुना मिला। इसे लेकर वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग में सवाल भी उठे। दरअसल पूरे प्रदेश में समिति प्रबंधकों की हड़ताल चल रही थी तब रायगढ़ में प्रबंधक धान खरीदी की तैयारी कर रहे थे। इस बार खेल यहीं हो गया। बाहरी धान पहले दिन से खपाना शुरू हो गया।























