- खरीदी बंद होने के बाद पहले भौतिक सत्यापन होगा, फिर उठाव, कई मिलर्स को लगा झटका
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। राज्य सरकार ने 15 नवंबर से शुरू होने वाली धान खरीदी की पूरी तैयारी कर ली है। कस्टम मिलिंग नीति में एक ऐसा बिंदु डाला गया है जिससे मिलर्स को पसीना आ गया है। किसी भी राईस मिल को 31 जनवरी तक धान नहीं दिया जाएगा। खरीदी पूरी होने के बाद ही उठाव किया जाएगा। इससे मिलर्स की योजनाओं को धक्का लगा है। धान की रिसायक्लिंग रोकने के लिए किए जा रहे प्रयास अब भी नाकाफी हैं। धान उठाव के लिए डीओ जारी करने के बाद सरकार सोचती है मिलर उस धान को उठाकर ले जाएगा, लेकिन ऐसा होता नहीं है।
समितियों और राईस मिलर्स का गठजोड़ इतना मजबूत है कि डीओ का धान बिना उठाव किए वहीं खप जाता है। मिलर को धान उठाव की पावती मिल जाती है। यह धान रिक्त या फर्जी रकबे पर खरीदी के रूप में दर्ज हो जाता है। डीओ के धान का सौदा 2500-2600 रुपए प्रति क्विंटल में हाता है जबकि सरकार किसानों को 3100 रुपए की दर से भुगतान करती है। मतलब बैठे-बैठे प्रति क्विंटल कम से कम 500 रुपए का मुनाफा होता है। इसे रोकने के लिए इस बार की कस्टम मिलिंग नीति में बदलाव किया गया है।
आदेश में कहा गया है कि वर्ष 25-26 में नागरिक आपूर्ति निगम में 50 प्रश चावल जमा करने पर ही मिल से अनुबंध किया जाएगा। लेकिन धान उठाव के लिए तभी दिया जाएगा जब खरीदी पूरी हो जाए। 15 नवंबर से 31 जनवरी तक धान खरीदी संभावित है। मतलब 31 जनवरी के पहले धान नहीं मिलेगा। पीडीएस चावल की जरूरत होने पर नान की मांग पर डीओ दिया जा सकेगा।
एफसीआई का चावल जमा करने का प्लान
रायगढ़ के राईस मिलर्स को वर्ष 25-26 का भारतीय खाद्य निगम में 252447 एमटी चावल जमा करना है। इसकी तुलना में 96174 एमटी चावल (38 प्रश) जमा किया जा सका है। अभी भी 156273 एमटी चावल जमा करना बाकी है। इसी तरह नान में 133296 एमटी जमा करना था, जिसमें से 112982 एमटी जमा हो चुका है। अभी 20314 एमटी बाकी है। एफसीआई में भारी भरकम टारगेट को पूरा करने के लिए मिलर्स खरीफ फसल का इंतजार कर रहे थे। अब 31 जनवरी तक धान नहीं मिलेगा तो एफसीआई का चावल जमा नहीं होगा। धान उठाव शुरू होते ही नान का नया आवंटन आ जाएगा।








