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साढ़े तीन करोड़ टन फ्लाईएश का क्या करेंगे, अभी दो करोड़ पहुंचा आंकड़ा!

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  • पांच साल में तकरीबन दोगुना हो जाएगा राखड़ उत्सर्जन, तब तक अवैध खदानों में भी हो जाएगी डम्पिंग

रायगढ़ (केलो प्रवाह)। रायगढ़ के माथे पर गौरव का टीका लगेगा जब यह देश के सबसे ज्यादा बिजली और कोयला उत्पादन वाले शीर्ष पांच जिलों में शुमार होगा। इसके लिए जो कीमत हम-आप चुकाएंगे, उसका भी पूर्वानुमान लगाना जरूरी है। जितनी ज्यादा बिजली बनेगी, उतना ज्यादा कोयला जलेगा, उतना ही ज्यादा फ्लाई एश निकलेगा। इसके पूर्ण निराकरण के उपाय सीमित हैं। यह सच है कि बढ़ती जनसंख्या और सुविधा-संसाधनों के कारण बिजली की मांग भी उसी गति से बढ़ रही है। देश में बिजली आपूर्ति के लिए ईंधन के रूप में सबसे ज्यादा कोयले का ही उपयोग होता है। आने वाले पांच सालों में जिले में चार नए पावर प्लांट जुड़ेंगे।

इसके साथ ही तकरीबन पांच नए कोल माइंस से भी उत्पादन प्रारंभ हो जाएगा। रायगढ़ जिला देश के उन टॉप पांच जिलों में शुमार होगा, जहां पर स्थापित विद्युत संयंत्रों की उत्पादन क्षमता 14 हजार मेगावाट से अधिक हो जाएगी। इन प्लांटों में जलने वाला कोयला भी रायगढ़ की ही खदानों से दिया जाएगा। वर्तमान में रायगढ़ जिले में 30 केप्टिव और कमर्शियल पावर प्लांट हैं। अभी कुल उत्पादन क्षमता 7979 मेगावाट है। पांच साल बाद इन प्लांटों में से एनटीपीसी 1600 से बढक़र 4800 मेगावाट, जेपीएल का 3400 मेगावाट, अडाणी पावर 600 से बढक़र 2200 मेगावाट, टीआरएन 600 मेगावाट, सारडा एनर्जी 600 से बढक़र 1200 मेगावाट, टोरेंट पावर 1600 मेगावाट जुड़ जाएंगे।

कुछ नए केप्टिव पावर प्लांट भी शुरू होंगे तो कुछ का विस्तारण भी होगा। रायगढ़ जिले में कुल स्थापित क्षमता करीब 14400 मेगावाट हो जाएगी। वर्तमान की तुलना में साढ़े छह हजार मेगावाट उत्पादन बढ़ जाएगा। तब फ्लाई एश उत्सर्जन का भी अनुमान लगाना होगा। वर्तमान में जिले में करीब 1.95 करोड़ टन फ्लाई एश उत्सर्जित हो रहा है। जब बिजली उत्पादन 14,400 मेगावाट होगा तो फ्लाई एश की मात्रा भी करीब 3.50 करोड़ टन पहुंचेगी। यूटीलाइजेशन के उपाय अभी नाकाफी हैं तो फिर राखड़ उत्सर्जन दोगुना होने पर क्या होगा? इस संबंध में न तो सीपीसीबी के पास कोई उपाय है और न ही सरकार के पास।

कहां-कहां हो रहा डिस्पोजल

वर्ष 25-26 में जिले में 1,94,47,922 एमटी फ्लाई एश का उत्सर्जन हुआ। इसमें से 1.55 लाख टन सीमेंट प्लांट, 11.96 टन ब्रिक्स प्लांट, 46 लाख लैण्ड फिलिंग, 1.26 करोड़ टन खदान भराव और 22.23 लाख रोड निर्माण में उपयोग किया गया है। केवल एनटीपीसी ने एनएचएआई से एग्रीमेंट किया है जिसमें एश का डिस्पोजल हो रहा है। अन्य प्लांटों ने किस रोड के निर्माण में राखड़ का उपयोग किया है, यह स्पष्ट नहीं है। माइंस फिलिंग और लैण्ड फिलिंग में दी गई अनुमति और डिस्पोजल के आंकड़ों का मिलान भी जरूरी है।

खुद को जलाकर पूरा देश करेंगे रोशन

रायगढ़वासियों के लिए यह सवाल वाजिब है कि प्लांटों में यहां का कोयला जलेगा, यहां की बिजली से पूरा देश रोशन होगा, लेकिन इसके बदले जो प्रदूषण होगा, वह सिर्फ यहां के लोगों के हिस्से में आएगा। उसमें देश का कोई दूसरा राज्य हिस्सेदार नहीं होगा। फ्लाई एश के अलावा तापमान में असामान्य बढ़ोतरी, वनों की बेहिसाब कटाई भी होगी। इसके लिए भी रायगढ़ को तैयार रहना होगा।

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