रायगढ़ (केलो प्रवाह)। सरकार नवा तरिया, आय के जरिया की नई योजना लेकर आई है। मतलब पुराने तालाब अब किसी काम के नहीं हैं। शायद इसीलिए खरसिया नगर पालिका क्षेत्र में ट्रस्ट के पुराने भगत तालाब को पाटकर रोड बनाई जा रही है ताकि आगे की जमीनों की कीमतें आसमान छुएं। हैरानी की बात यह है कि इस मनमानी पर पूरा प्रशासन चुप है। नियम सिर्फ उसी के लिए होते हैं जो उसका पालन करना चाहता है, जिसके पास ताकत है, वह नियमों को अपने हिसाब से बदल देता है। एक ओर सरकार ने भूजल स्तर बढ़ाने के लिए पुराने जल स्रोतों का संरक्षण करने का प्रण लिया है।
वहीं उसकी ही खरसिया नगर पालिका में इस प्रण को तोड़ दिया गया है। नया तालाब बनाना तो दूर, जमीनों के लालचियों ने पुराने तालाब को पाट दिया है। गंभीर साजिश करते हुए भगत तालाब का एक हिस्सा पाट दिया गया है। बताया जा रहा है कि पहले छठ पूजा के लिए घाट बनाने की मांग की गई। इसकी विधिवत मंजूरी नहीं मिली तो खुद से ही काम शुरू कर दिया गया। बताया जा रहा है कि भगत तालाब या मछली तालाब के एक हिस्से में मिट्टी डंप करते हुए पाट दिया गया। कुछ लोगों ने इसका विरोध किया लेकिन दादागिरी से काम किया गया। तालाब को पाटने की अनुमति कोई भी नहीं दे सकता, चाहे वह थोड़ा सा ही हिस्सा क्यों न हो। छठ घाट बनाने के लिए विधिवत नपा से मंजूरी ली जानी चाहिए थी। इसके पीछे कुछ और ही कहानी बताई जा रही है।
जमीनों के रेट बढ़ाने के लिए काम
तालाब की मेड़ को पाटकर चौड़ी रोड बना दी गई है। भाजपा सरकार तालाबों का संरक्षण करते हुए उनका क्षेत्रफल बढ़ा रही है। नपा खरसिया में भी भाजपा की सरकार है लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। इसके लिए कोई काम भी मंजूर नहीं है। पहले भी भगत तालाब के बड़े हिस्से पर कब्जा हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक आगे कुछ नामी-गिरामी लोगों की जमीन है। रोड बन जाने से जमीनों की कीमत बढ़ जाएगी। इसलिए छठ घाट के नाम पर तालाब की बलि दी जा रही है।
क्या कहते हैं कमल
छठ पूजा के लिए घाट बनाने का प्रयास हो रहा है। इसलिए मेड़ को चौड़ा किया जा रहा है। तालाब को पाटने जैसी कोई बात नहीं है। आपको कहां से पता चला।
- कमल गर्ग, अध्यक्ष
नपा खरसिया





























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