- किसान पंजीयन में प्रशासनिक सख्ती और वास्तविक रकबे की पहचान का असर
- पिछले साल 1,41,319 हेक्टेयर था पंजीकृत रकबा, इस बार घटकर 1,32,690 हेक्टेयर
रायगढ़ (केलो प्रवाह)। किसान पंजीयन में प्रशासनिक सख्ती और वास्तविक रकबे की पहचान की वजह से पंजीयन रकबा कम हो रहा है। गत वर्ष पंजीकृत किसानों की संख्या तो करीब उतनी ही है, लेकिन पंजीयन रकबा कम हो गया है। करीब 9 हजार हेक्टेयर की कमी आई है। अभी बहुत कम किसानों का पंजीयन शेष है। साल दर साल शासन धान खरीदी से कोचियों और बिचौलियों को बाहर निकालने के लिए प्रयास कर रही है। जिनकी वजह से फर्जी खरीदी होती है, उन पर कार्रवाई भी की जा रही है। कुछ को पद से पृथक कर दिया गया है तो कुछ की समिति बदल दी गई है।
किसान पंजीयन में भी डिजिटल तरीकों से नजर रखी जा रही है। एग्रीस्टेक पंजीयन होने पर ही धान विक्रय किया जा सकेगा। इस नियम के बाद पंजीयन का तौर-तरीका बदल गया है। पंजीकृत रकबे का डीसीएस सर्वे के बाद धान का रकबा अलग से निकलेगा। उसी पर धान खरीदी होगी। इस सख्ती का असर यह हुआ है कि कुल पंजीकृत रकबा भी कम हो गया है। वर्ष 2025-26 में रायगढ़ जिले की 79 समितियों में 83,641 किसानों ने 1,41,319 हेक्टेयर का पंजीयन करवाया था। इस बार भी एग्रीस्टेक से पंजीयन जारी है।
पंजीयन का अंतिम चरण चल रहा है। अब तक जिले में 83,584 किसानों ने 1,32,690 हेक्टेयर रकबे का पंजीयन करवाया है। किसानों की संख्या तकरीबन पिछले साल की तरह ही है, लेकिन रकबे में 8,629 हेक्टेयर की कमी हो गई है। किसान संख्या में 500 का भी इजाफा होता है तो भी रकबे में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी। सख्त निर्देशों का सकारात्मक असर हो रहा है। केवल वास्तविक किसानों से वास्तविक धान रकबे पर ही खरीदी की जाएगी।
धान का रकबा भी होगा कम
किसानों की पूरी कृषि भूमि का पंजीयन एग्रीस्टेक में किया जा रहा है। इसमें डीसीएस सर्वे का आंकड़ा डाला जाएगा। जिस खेत में धान लगा होगा, उसी का धान खरीदा जाएगा। गत वर्ष पंजीकृत 1,41,319 हेक्टेयर रकबे में से धान का रकबा 1,25,310 हेक्टेयर पाया गया था। मतलब 16 हजार हेक्टेयर में या तो दूसरी फसल लगी थी या पड़ती थी। इस बार पंजीयन रकबा ही कम हो गया है, इसलिए धान का रकबा भी कम होगा।
वर्ष किसान पंजीकृत रकबा 2025-26 83,641 1,41,319 हेक्टेयर 2026-27 83,584 1,32,690 हेक्टेयर























