- 6 एकड़ बंजर भूमि पर 80 प्रतिशत हिस्से में होगा पौधारोपण
- ढिमरापुर और कोतरा रोड के आधा दर्जन वार्डों को मिलेगा सीधा फायदा, गज़ेबो और जॉगिंग ट्रैक की मिलेगी सुविधा
रायगढ़। शहर के गजानंदपुरम क्षेत्र में 10.45 करोड़ रुपये की लागत से रायगढ़ का सबसे बड़ा ऑक्सी-ज़ोन बनाया जाएगा। वित्त मंत्री और स्थानीय विधायक ओपी चौधरी के प्रयासों से वार्ड नंबर 40 की करीब 6 एकड़ बंजर भूमि पर इस भव्य प्रोजेक्ट को स्वीकृति मिल गई है। हाल ही में भूजबंधान तालाब के लिए 5 करोड़ और रामलीला मैदान के कायाकल्प के बाद, ओपी चौधरी की तरफ से शहरवासियों के लिए यह एक और बड़ी सौगात है।
आगजनी के खतरे से मिलेगी मुक्ति, बनेगा शहर का ‘फेफड़ा’
होटल ट्रिनिटी और पूर्व विधायक प्रकाश नायक के निवास के पीछे स्थित यह जमीन लंबे समय से खाली पड़ी थी। पूर्व में यहां रखे विद्युत विभाग के ट्रांसफार्मरों में भीषण आगजनी हो चुकी है। घनी आबादी के बीच इस खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों ने इसके स्थायी समाधान के लिए वित्त मंत्री से गुहार लगाई थी। जनभावनाओं का सम्मान करते हुए ओपी चौधरी ने इस रिक्त पड़ी जमीन को शहर के ‘फेफड़े’ (ऑक्सीजन ज़ोन) के रूप में विकसित करने का विजन दिया, जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।
80 प्रतिशत हिस्से में रहेगा ग्रीन ज़ोन
इस ऑक्सी-ज़ोन का निर्माण छत्तीसगढ़ हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड द्वारा किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत कुल 6 एकड़ जमीन के 80 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से को सघन वृक्षारोपण और हरियाली के लिए आरक्षित रखा जाएगा। आमजन की सुविधा के लिए परिधि में आउटर जॉगिंग ट्रैक और अंदर घुमावदार पाथ-वे बनाए जाएंगे, जहां हजारों लोग सुबह-शाम सैर कर सकेंगे।
पार्क में होंगी ये आधुनिक सुविधाएं
- सिटिंग और सेंट्रल प्लाजा: पार्क के बीच में अंडाकार सेंट्रल प्लाजा और बैठने के लिए 5 स्थानों पर गोलाकार गज़ेबो (चबूतरे) बनेंगे।
- सुविधाएं: मुख्य द्वार पर ऑल वेदर पक्की पार्किंग, टिकट काउंटर, गार्ड रूम, बच्चों के लिए झूले, वेंडिंग ज़ोन, टॉयलेट ब्लॉक और व्यवस्थित लाइटिंग होगी।
आधा दर्जन वार्डों को फायदा
यह रायगढ़ का पहला इतना बड़ा और व्यवस्थित ऑक्सी-ज़ोन होगा। इससे ढिमरापुर और कोतरा रोड क्षेत्र के करीब आधा दर्जन वार्डों की 15 हजार से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा। ज्ञात हो कि इससे पहले शहर के मध्य इतवारी बाजार में ‘सिंदूर पार्क’ का लोकार्पण किया जा चुका है, वहीं जूटमिल क्षेत्र की बंद पड़ी किसान राइस मिल में भी ऑक्सी-ज़ोन का विकास कार्य जारी है।























