नई दिल्ली। दिवाली और धनतेरस के बाद से सोने-चांदी के बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है। अरब सागर के हालात से लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव तक हर कारक का असर अब बुलियन मार्केट पर साफ दिखने लगा है। चीन-अमेरिका के बीच तनाव कम होने और डॉलर के मजबूत होने से निवेशकों का रुख बदल रहा है। यही वजह है कि बुधवार को भी सोना और चांदी लगातार दूसरे दिन गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे।
सोना-चांदी की कीमतों में भारी गिरावट
बुधवार शाम तक MCX (मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज) पर सोना करीब 5.6% लुढ़ककर ₹1,20,600 प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। यह अपने पिछले उच्च स्तर ₹1,28,271 से करीब ₹7,200 सस्ता है। वहीं, चांदी ₹1,43,900 प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ गई है, जो करीब ₹6,000 की गिरावट दर्शाती है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी स्थिति कुछ बेहतर नहीं है। वहां सोना तीन कारोबारी सत्रों में $4,300 प्रति औंस से गिरकर $4,020 प्रति औंस तक फिसल चुका है। पिछले 12 सालों में यह सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
निवेशकों के लिए चेतावनी: “जल्दबाजी न करें”
बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने की सलाह दी है। उनका कहना है कि –
- अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में अनिश्चितता,
- डॉलर की मजबूती,
- अमेरिकी सरकार के शटडाउन से आर्थिक डेटा की कमी,
- और भारत में धनतेरस के बाद मौसमी मांग घटने जैसे कारणों ने सोने पर दबाव बढ़ाया है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने की मौजूदा गिरावट “टेक्निकल करेक्शन” है, यानी लंबे समय के लिए रुझान अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है।
आरबीआई ने भी बढ़ाया गोल्ड रिजर्व
सोने की अंतरराष्ट्रीय गिरावट के बीच भारत का गोल्ड रिजर्व नया रिकॉर्ड बना चुका है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2025 के अंत तक देश का सोना भंडार 880 टन के पार पहुंच गया। इसमें सिर्फ सितंबर के अंतिम सप्ताह में ही 0.2 टन सोना जोड़ा गया। केंद्रीय बैंक का कुल गोल्ड वैल्यू अब लगभग 95 अरब डॉलर है। रिजर्व बैंक ने बीते छह महीनों में 0.6 टन सोना खरीदा, जिससे साफ है कि संस्थागत स्तर पर अब भी सोने में भरोसा बरकरार है।
धनतेरस के बाद मांग में गिरावट
त्योहारी सीजन में जहां सोने की मांग ने नया रिकॉर्ड बनाया था, वहीं अब बाजार में ठंडक लौट आई है। पिछले 5 दिनों में सोना ₹6,700 और चांदी ₹18,000 से ज्यादा सस्ती हो चुकी है। 17 अक्टूबर को जहां 24 कैरेट सोना ₹1,30,874 प्रति 10 ग्राम था, अब यह घटकर ₹1,23,907 रह गया है।
आगे क्या होगा?
मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि फिलहाल जो करेक्शन दिख रहा है, वह स्वाभाविक है। पिछले एक साल में सोने-चांदी के दामों में जबरदस्त तेजी आई थी, इसलिए थोड़ी गिरावट तकनीकी रूप से जरूरी थी। लेकिन लंबी अवधि में दोनों धातुओं का आउटलुक पॉजिटिव माना जा रहा है।
एक्सपर्ट व्यू:
“यह गिरावट अस्थायी है। अगर कोई निवेशक दीर्घकालिक निवेश करना चाहता है, तो मौजूदा रेट्स पर थोड़ी-थोड़ी खरीदारी शुरू की जा सकती है। अगले कुछ महीनों में दाम फिर चढ़ सकते हैं।” – कमोडिटी एक्सपर्ट्स
अभी सोना-चांदी दोनों में तेज गिरावट है, लेकिन यह शायद ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी। जो लोग निवेश की सोच रहे हैं, उनके लिए यह “डिप पर बाय” करने का मौका हो सकता है। हालांकि, शॉर्ट टर्म में और मामूली गिरावट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।


























