रायपुर। इन दिनों प्रदेश भर में सरकार का एक खास अभियान चल रहा है, जिसका सीधा मकसद है जनता की शिकायतों का मौके पर ही निपटारा करना। लेकिन समाधान के इन शिविरों में कुछ ऐसा हो रहा है जिसकी चर्चा अब हर नुक्कड़ और चौराहे पर है। एक ऐसा ही नजारा तब देखने को मिला, जब भरे मंच पर बैठे एक कद्दावर नेता का पारा अचानक सातवें आसमान पर पहुंच गया। हाथ में माइक था और सामने खड़ी थी अफसरों की भारी-भरकम फौज। लेकिन एक जिम्मेदार अधिकारी की गैरमौजूदगी ने माहौल में ऐसी गर्मी ला दी कि मौके से ही सीधे निलंबन का फरमान जारी हो गया। यह कोई और नहीं, बल्कि अपनी बेबाक और सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले सांसद बृजमोहन अग्रवाल थे, जिनका यह रूप अब सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
बाउंड्री वॉल के पेंच से शुरू हुआ पूरा बवाल
दरअसल, यह पूरा मामला एक सरकारी कॉलेज की चारदीवारी के निर्माण से जुड़ा हुआ है। पुलेश्वर महादेव शासकीय महाविद्यालय के लिए बाउंड्री वॉल बननी है, लेकिन वन विभाग की आपत्तियों के चलते यह जरूरी काम अटका पड़ा है। समाधान शिविर में जब स्थानीय लोगों ने यह मुद्दा उठाया, तो सांसद अग्रवाल ने तुरंत वन विभाग के अधिकारियों से जवाब-तलब कर लिया। उन्होंने दो टूक शब्दों में पूछा कि आखिर जंगल की जमीन होने पर बाउंड्री बनाने में क्या परेशानी आ रही है। उन्होंने मौके पर ही एक व्यावहारिक सुझाव देते हुए कहा कि अगर नियमों के तहत पक्की ईंट-गारे की दीवार नहीं बन सकती, तो कम से कम कंटीले तार लगाकर और सघन पौधारोपण कर कैंपस को सुरक्षित तो किया ही जा सकता है। उनका स्पष्ट मानना था कि छात्रों की सुविधाओं के मामले में इस तरह की अड़ंगेबाजी ठीक नहीं है।
“रेंजर कौन है… उसे सस्पेंड करो”
जब सांसद इस मामले की गहराई में जाने लगे, तो उन्हें पता चला कि वन विभाग का जो जिम्मेदार अधिकारी वहां लोगों की बात सुनने के लिए होना चाहिए था, वह तो वहां मौजूद ही नहीं है। यह जानते ही बृजमोहन अग्रवाल का गुस्सा फूट पड़ा। सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि वे मंच से ही पूछ रहे हैं कि भंवरिया (रेंजर) क्यों नहीं आया है? जब उसे इस शिविर में होना चाहिए था, तो वह गायब कैसे है? इसके बाद बिना कोई देर किए उन्होंने मंच पर मौजूद आला अधिकारियों को कड़े निर्देश दे दिए। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि उस रेंजर को तत्काल प्रभाव से कारण बताओ नोटिस जारी करें या सीधे सस्पेंड कर दें। इसके तुरंत बाद उन्होंने अपनी नाराजगी जताते हुए खुद ही कह दिया कि जाओ, सस्पेंड कर दिया उसको।
शिक्षा से कोई समझौता नहीं, मंच से दी गई सौगातें
अब आपको बताते हैं कि यह पूरी गहमागहमी आखिर हुई कहां। यह पूरा वाकया गोबरा-नवापारा इलाके के हरिहर हाई स्कूल मैदान का है, जहां आम जनता के लिए यह सुशासन तिहार शिविर लगाया गया था। इस दौरान कड़े तेवर दिखाते हुए सांसद ने यह साफ संदेश दे दिया कि शिक्षा और बच्चों के भविष्य से जुड़े किसी भी मुद्दे पर सरकारी अमले की हीलाहवाली कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, इस तल्खी के बीच उन्होंने नवापारा नगर के लोगों को कतई निराश नहीं किया। शिविर के दौरान उन्होंने क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण विकास कार्यों का ऐलान किया और जनता को बड़ी सौगातें दीं। इस पूरे आयोजन में भारतीय जनता पार्टी के कई बड़े चेहरे, जनप्रतिनिधि और भारी प्रशासनिक अमला मौजूद था, जो इस पूरी घटना का गवाह बना।
सार्वजनिक फटकार पर अब छिड़ गया नया बहस
एक तरफ जहां आम जनता अपने नुमाइंदों की इस तरह की सख्त कार्रवाई और त्वरित एक्शन से खुश नजर आती है, वहीं दूसरी तरफ इस पूरी कार्यशैली ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया है। भरे मंच से अफसरों की इस तरह होने वाली सार्वजनिक फजीहत से अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन खासे खफा हैं।
कर्मचारियों के संगठन ने गहरी नाराजगी जताते हुए चेतावनी दी है कि सार्वजनिक मंचों से किसी भी कर्मचारी को इस तरह अपमानित करना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है, इससे काम करने वाले मैदानी अमले का मनोबल टूटता है। इसके उलट, सत्ता पक्ष के मंत्रियों का स्पष्ट तर्क है कि जनता ने उन्हें चुना है, इसलिए जनसमस्याओं पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करना जनप्रतिनिधियों का बुनियादी फर्ज है। अब इस मसले पर नेताओं और कर्मचारी संगठनों के बीच जो आर-पार की बहस छिड़ी है, वह फिलहाल थमती हुई नजर नहीं आ रही।






















