- पहले राईस मिलों के नाम पर की मनमानी, अब वेयर हाउस का ट्रेंड
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। उद्योग विभाग में पूंजीगत सब्सिडी का खेल अब भी जारी है। इकाइयों की लागत दो गुना बताकर सब्सिडी क्लेम करने का पुराना तरीका अब भी कारगर है। पहले राइस मिलों के लिए मनमानी सब्सिडी ली गई और अब वेयरहाउस का चलन है। एक वेयरहाउस के लिए उतनी ही लागत दिखाई जा रही है जितनी किसी राइस मिल के लिए दिखाई जाती है। हाल ही में हुई बैठक में मात्र 8 वेयरहाउस के लिए सवा पांच करोड़ सब्सिडी देने की मंजूरी दे दी गई। सरकारी राशि का जितना दुरुपयोग उद्योग विभाग कर रहा है, उतना शायद ही कहीं होता है। बिना देखे, बिना जांचे, इकाइयों को सब्सिडी बांटी जा रही है। रेवड़ी की तरह रुपए बांटे जा रहे हैं।
पूंजीगत अनुदान और ब्याज अनुदान के रूप में चिह्नित इकाइयों या कारोबार को सरकार सहायता देती है। छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए यह किया जाता है। पहले रायगढ़ और सारंगढ़ में राइस मिलों के नाम पर करोड़ों की सब्सिडी बांटी गई। जब राइस मिल को सूची से हटा दिया गया तो अब वेयरहाउस का ट्रेंड शुरू हो चुका है। कांग्रेस के कार्यकाल में चर्चित आईएएस अनिल टुटेजा ने जो सिस्टम बनाया था, अब भी वही चल रहा है। नियमत: पुरुष के लिए 35 प्रश और महिला के लिए 38.5 प्रश अनुदान मिलता है। भारी भरकम सब्सिडी पाने के लिए धड़ल्ले से वेयरहाउस बनाए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक 10 अगस्त को जिला स्तरीय समिति की बैठक रखी गई थी जिसमें वेयरहाउसों को करीब सवा 8 करोड़ रुपए सब्सिडी देने की मंजूरी दी गई।
कोटरापाली के श्री श्याम वेयरहाउस को 76.11 लाख, औरदा के शशि बेरीवाल को 83.91 लाख, परसदा के श्री श्याम वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन को 84.65 लाख, सहदेवपाली में रितु अग्रवाल को 85.83 लाख रुपए की सब्सिडी मंजूर की गई है। मजे की बात यह है कि यह राशि 35-40 प्रश ही है मतलब लागत दो करोड़ दिखाई गई है। अब दो करोड़ की लागत से कैसा वेयरहाउस तैयार हो रहा होगा। इसके अलावा 22 मामलों में 8.34 करोड़ रुपए की सब्सिडी लिस्ट भी दिलचस्प है। जानबूझकर लागत बढ़ाकर बताई जाती है जिसको मंजूर भी कर लिया जाता है। यह पुरानी व्यवस्था है जो कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई थी। लागत को बढ़ाकर दिखाने के लिए बिलों में हेराफेरी की जाती है। उद्योग विभाग सतही निरीक्षण करके काम पूरा कर देता है।
उपयोग होने पर ही सब्सिडी
वेयर हाउसों को सब्सिडी का गणित बहुत दिलचस्प है। कोई भी कहीं भी गोदाम बनाकर सब्सिडी नहीं ले सकता जब तक कि उसका उपयोग न हो। राइस मिलों के लिए सब्सिडी बंद होने के बाद लोगों ने वेयर हाउस के नाम पर लागत के बराबर अनुदान ले लिया। आठ इकाईयों के नाम पर 5.17 करोड़ की सब्सिडी मंजूरी दी गई है।
फर्जी रिपोर्ट पर दे चुके हैं सब्सिडी
पूर्व में महालक्ष्मी राईस मिल ग्राम अमुर्रा बरमकेला और हनुमान फूड्स मानिकपुर का फर्जीवाड़ा पकड़ा जा चुका है जिसे उद्योग विभाग के पूर्व सीजीएम ने दबा दिया। महालक्ष्मी राइस मिल के लिए आईएचएसडी में लाइसेंस के लिए आवेदन किया जिसमें लागत 53.20 लाख रुपए बताई। उपकर के रूप में एक प्रश राशि 53,200 रुपए चालान के जरिए चुकाए गए थे। इसी फर्म के लिए डीआईसी में लागत 1,30,68,000 रुपए बताई गई। इसी तरह हनुमान फूड्स मानिकपुर के संचालक चंदन अग्रवाल ने श्रम विभाग में 37.50 लाख रुपए की लागत दिखाई जिससे मात्र 37,500 रुपए ही सेस देना पड़ा। जबकि डीआईसी में 1.26 करोड़ की लागत दिखा दी। तत्कालीन जीएम डीआईसी ने मामले को दबा दिया और भरपूर सब्सिडी दोनों को बांटी। जबकि प्रकरण में एफआईआर दर्ज की जानी थी।






















