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बिना रॉयल्टी पर्ची के पार हो रही गाड़ियां, खनिज बैरियर पर लगा दो ताला

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  • गुड़ेली और टिमरलगा में लाईमस्टोन का अवैध खनन जोरों पर, अनुमति से अधिक गहराई तक खनन

रायगढ़, 6 जनवरी। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खनन माफिया बेलगाम हो चुके हैं। खनिज विभाग की नकारेपन की वजह से लाइमस्टोन और डोलोमाइट का अवैध खनन जोरों पर है। परिवहन में भी रॉयल्टी पर्ची की जरूरत खत्म हो चुकी है। खनिज अधिकारी ने जिसको आशीर्वाद दे दिया, वह बिना पर्ची के कहीं भी माल भेज सकता है।
पिछले दिनों खनिज विभाग रायगढ़ ने टिमरलगा और गुड़ेली के कई वाहनों को गिट्टी समेत जब्त किया था। हाईवा क्रमांक सीजी 13 एआर 4036 को पकड़ा गया था जिसमें 40 टन चूना पत्थर लोड मिला। इस गाड़ी में रॉयल्टी पर्ची ही नहीं मिली। गुड़ेली के क्रशर से निकली गाड़ी पहले टिमरलगा बैरियर पहुंची। वहां से रायगढ़ आई। बैरियर में बिना पर्ची की इस गाड़ी को बिना रुके जाने दिया गया क्योंकि क्रशर संचालक और खनिज अधिकारी के बीच सांठगांठ हो चुकी है। ऐसे एक क्रशर नहीं बल्कि दर्जनों क्रशर हैं।

सूत्रों के मुताबिक क्रशर संचालकों की ओर एक प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है जो सारंगढ़ के खनिज अधिकारी से सालाना दर पर डील करता है। एकमुश्त समझौते के तहत बिना पर्ची की गाडिय़ां नहीं पकड़ी जाती। लाइमस्टोन और डोलोमाइट की कोई भी गाड़ी सारंगढ़ में नहीं पकड़ी जाती। जो गिट्टी रायगढ़ भेजी जाती है, उसे भी बिना पर्ची के भेज दिया जाता है। कभी-कभी कोई गाड़ी यहां जांच में पकड़ी जाती है। रात को जितनी भी हाईवा गिट्टी लेकर पहुंचती हैं, किसी में पर्ची नहीं होती। ओवरलोड गिट्टी ढोना तो सामान्य सी बात है। 40 टन की पर्ची में 5-7 टन ज्यादा ही गिट्टी होती है। गुड़ेली और टिमरलगा में करीब सौ क्रशर हैं, जिनमें चूना पत्थर का उत्पादन हो रहा है। वैध खनिपट्टे तो करीब 45 ही हैं। अवैध खदानें बेहिसाब हैं। हर जमीन के नीचे चूना पत्थर होने की वजह से कई क्रशर संचालक ग्रामीणों की जमीन खरीदकर या लीज एग्रीमेंट के जरिए अवैध खनन कर रहे हैं।

क्रशरों में खप रहा अवैध पत्थर
इसका गणित अलग ही है। चूना पत्थर की अवैध खदान से निकले बोल्डरों को क्रशिंग करने के बाद रॉयल्टी पर्ची के जरिए इसे सप्लाई की जाती है। कुछ खनिपट्टों से उत्पादन ही नहीं होता केवल दिखाया जाता है। अवैध खनिज को वैध बनाने के लिए खनिज विभाग रॉयल्टी पर्ची दे देता है। बैरियर में बैठे कर्मचारी बिना जांच के ही गाडिय़ों को निकाल देते हैं। प्रति वाहन राशि फिक्स है। एसेसमेंट में खनिज विभाग बहुत ज्यादा गड़बड़ी करता है।

आसपास की जमीनों को भी खोदा
खनिपट्टा धारकों ने टिमरलगा, गुड़ेली, सेंदुरस, लालाधुरवा, खर्री बड़े गांव में लीज एरिया से अधिक पर खनन कर लिया है। खनिज और राजस्व विभाग की संयुक्त टीम बनाकर कभी जांच ही नहीं कराई गई। खनिज विभाग ही नहीं चाहता कि जांच हो। ऐसा किया गया तो विभाग की गलती पकड़ी जाएगी। इसलिए क्रशरों को अवैध कमाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। फ्लाईएश से पाटकर अवैध खनन के सबूत मिटाए जा रहे हैं।

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Editorial

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