रायगढ़ (केलो प्रवाह)। रायगढ़ जिले के पुसौर नगर पंचायत की राजनीति में इन दिनों भारी उथल-पुथल मची हुई है। विकास कार्यों की अनदेखी और नगर पंचायत अध्यक्ष की कार्यशैली से नाराज होकर 8 भाजपा पार्षदों के सामूहिक रूप से इस्तीफा देने की खबर से स्थानीय सियासत में कोहराम मच गया है। बताया जा रहा है कि इन असंतुष्ट पार्षदों ने भाजपा जिलाध्यक्ष अरूणधर दीवान के नाम इस्तीफे का आवेदन दिया है। 15 सदस्यीय पुसौर नगर पंचायत में भाजपा का स्पष्ट बहुमत है। वर्ष 2025 के आधिकारिक निर्वाचन रिकॉर्ड के अनुसार श्रीमती मानी मोहित सतपथी यहां की अध्यक्ष हैं। ऐसे में सत्ताधारी दल के पार्षदों का अपनी ही परिषद के खिलाफ बगावती सुर अपनाना स्थानीय निकाय की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
अध्यक्ष की कार्यशैली पर उठे सवाल, मूलभूत सुविधाएं ठप
पार्षदों ने अपने इस्तीफे के आवेदन में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक कामकाज और शासकीय कर्मचारियों समेत नगर पंचायत अध्यक्ष के स्तर पर उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। विकास कार्य नहीं होने से सभी पार्षद गहरी पीड़ा में हैं। पार्षदों के मुताबिक, उनके वार्डों में जनसुविधा से जुड़े पानी, बिजली, सड़क, नाली समेत अन्य मूलभूत विकास कार्य पूरी तरह से ठप पड़े हैं और पार्षद निधि से जुड़े काम भी नहीं किए जा रहे हैं। दूसरे शासकीय विभागों में भी उनके काम नहीं होने का आरोप लगाया गया है। इसी असंतोष के चलते वार्ड नंबर 6 से बलराम संवरा, वार्ड नंबर 14 से शौकीराम चौहान, वार्ड नंबर 11 से रूपेश कुमार साव, वार्ड नंबर 3 से मंजू पटेल, वार्ड नंबर 2 से फागूलाल प्रधान, वार्ड नंबर 1 से प्रदीप यादव, वार्ड नंबर 10 से वरूण महाणा और नगर पंचायत उपाध्यक्ष उमेश साव ने सामूहिक रूप से त्यागपत्र देने की बात कही है।
पति के दखल से भी आक्रोश
पार्षदों की नाराजगी का एक और बड़ा कारण नगर पंचायत के कामकाज में अध्यक्ष पति का अत्यधिक दखल बताया जा रहा है। पार्षदों का आरोप है कि चुनी हुई अध्यक्ष श्रीमती मानी मोहित सतपथी केवल दस्तावेजों पर दस्तखत करने तक सीमित हैं, जबकि कार्यालय का पूरा जिम्मा और सभी छोटे-बड़े फैसले उनके पति मोहित सतपथी ही लेते हैं। हर काम में पति के इस रवैये ने भी पार्षदों के भीतर भारी आक्रोश भर दिया है।
अध्यक्ष प्रतिनिधि बोले – पार्षदों के आरोप बेबुनियाद
बागी पार्षदों के इन गंभीर आरोपों पर नवनिर्वाचित नगर पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मानी मोहित सतपथी के पति और उनके प्रतिनिधि मोहित सतपथी ने अपना रुख साफ किया है। प्रतिनिधि मोहित सतपथी ने पार्षदों के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था के तहत नगर पंचायत अध्यक्ष के पास केवल पीआईसी (प्रेसिडेंट इन काउंसिल) और परिषद की बैठकें आयोजित करने का ही अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष अब ना तो कोई नोटशीट चला सकते हैं और ना ही किसी चेक पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। विकास कार्यों को धरातल पर उतारने और पार्षद निधि से जुड़े काम कराने की पूरी जिम्मेदारी कार्यालय, सीएमओ और इंजीनियरों की होती है। सतपथी ने जोर देकर कहा कि अध्यक्ष की ओर से किसी भी पार्षद का काम या पैसा बिल्कुल नहीं रोका गया है। पार्षद बिना किसी ठोस वजह के जबरदस्ती अध्यक्ष पर आरोप मढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि पार्षदों को किसी भी प्रकार की असंतुष्टि है, तो उन्हें अपनी बात संगठन और वरिष्ठ पदाधिकारियों के समक्ष रखनी चाहिए।
जिलाध्यक्ष बोले- आधिकारिक आवेदन नहीं मिला, चर्चा के लिए बुलाया
इस पूरे सियासी बवाल पर भाजपा जिलाध्यक्ष अरूणधर दीवान ने कहा है कि पुसौर नगर पंचायत के 8 पार्षदों ने अभी तक उन्हें इस्तीफे का कोई आधिकारिक आवेदन नहीं दिया है। सोशल मीडिया पर इस्तीफे की बात जरूर चल रही है, जिसे देखते हुए उन्होंने पार्षदों को बातचीत के लिए बुलाया है। फिलहाल, पार्षदों के इस सामूहिक इस्तीफे की सुगबुगाहट ने पुसौर के राजनीतिक समीकरणों को उलझा दिया है। अब देखना यह होगा कि भाजपा संगठन अपने इन असंतुष्ट पार्षदों को मनाने में कामयाब हो पाता है या फिर पुसौर नगर पंचायत की राजनीति आगे कोई नया मोड़ लेती है।























