- चंद्रपुर, सक्ती और शिवरीनारायण में चार बार टेंडर कॉल, नहीं आया कोई ठेकेदार
रायगढ़। नदियों को दूषित होने से बचाने के लिए एनजीटी के आदेश पर सीईसीबी ने सभी शहरों में एसटीपी निर्माण का आदेश दिया था। प्रदेश की जीवनरेखा महानदी को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। चंद्रपुर और सक्ती समेत तीन जगहों पर एसटीपी का टेंडर ही लंबे समय से लटका हुआ है।नदियों को गंदा करने में शहरों का सबसे बड़ा हाथ है। शहर का गंदा पानी सीधे नदी में डाला जाता है। देश के सर्वाधिक प्रदूषित नदीखंडों की रिपोर्ट आने के बाद इस पर नियंत्रण के लिए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण करने के आदेश दिए गए थे। वर्तमान में प्रदेश में 25 एसटीपी ऑपरेशनल हैं। जबकि 3 निर्माणाधीन हैं और 13 प्लानिंग स्टेज में हैं।
रायगढ़ नगर निगम ने दो एसटीपी का निर्माण किया है। केलो नदी को गंदगी से मुक्त करने के लिए निर्माण किया गया है। इसी तरह महानदी में भी दूषित पानी जाने से रोकने के लिए सक्ती, चंद्रपुर और शिवरीनारायण में भी एसटीपी का निर्माण किया जाना था। हैरानी की बात यह है कि तीनों ही स्थानों पर कई बार टेंडर कॉल हो चुका है लेकिन कोई भी ठेकेदार नहीं आया। सक्ती में 8 अप्रैल 2026 को पांचवी बार टेंडर कॉल किया गया है। चंद्रपुर और शिवरीनारायण में 15 दिसंबर 2025 को चौथी बार टेंडर लगा है। इतने महीनों बाद भी कोई ठेकेदार नहीं आया। इस वजह से शहर का गंदा पानी नाले और नालियों के जरिए महानदी में मिल रहा है।
रायगढ़ के बाकी निकायों में भी निर्माण नहीं
रायगढ़ नगर निगम में 25 और 7 एमएलडी के दो एसटीपी का निर्माण हो चुका है, लेकिन पुसौर, धरमजयगढ़, लैलूंगा, खरसिया और घरघोड़ा में निर्माण नहीं हुआ है। रायगढ़ शहर में भी कई नाले छूट गए हैं, जिनका पानी नदी में डाला जा रहा है।






















