Skip to content

रायगढ़ में अनोखी शादी: दूल्हा-दुल्हन का ‘अग्निपथ’ वाला गृह-प्रवेश, धधकते अंगारों पर नंगे पैर लिए सात फेरे! न पैरों में छाले न चेहरे पर शिकन… आस्था के सामने विज्ञान भी हैरान.. देखें VIDEO

E0A485E0A482E0A497E0A4BEE0A4B0E0A58BE0A482E0A4AAE0A4B0E0A4A6E0A581E0A4B2E0A58DE0A4B9E0A4A8E0A495E0A4BEE0A497E0A583E0A4B9E0A4AAE0A58DE0A4B0E0A4B5E0A587E0A4B6

रायगढ़। जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे भूपदेवपुर थाना क्षेत्र के गांव बिलासपुर में हाल ही में शादी की एक ऐसी रीत निभाई गई, जिसने विज्ञान और आधुनिकता के दावों को पीछे छोड़ दिया। यहाँ राठिया परिवार की नई बहू का स्वागत फूलों से नहीं, बल्कि धधकते हुए लाल अंगारों से किया गया। इस रस्म में पत्नी का साथ पति ने भी दिया और दोनों ने मिलकर नंगे पैर अंगारों पर सात फेरे पूरे किए। भीषण गर्मी की तपिश और सुलगती आग के बीच संपन्न हुई इस रस्म को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया। आइए जानते हैं इस अनोखी शादी और अनोखी रीति-रिवाज के बारे में..

मिली जानकारी के अनुसार, भूपदेवपुर के ग्राम बिलासपुर निवासी जयप्रकाश राठिया की बारात जब बाड़ादरहा गांव से दुल्हन पुष्पा को विदा कराकर वापस लौटी, तो रीति-रिवाज के अनुसार परिवार के सदस्यों ने दूल्हा और दुल्हन को अपनी गोदी में उठा लिया। परिजनों ने नवदंपती को गोद में उठाकर ही आंगन के भीतर प्रवेश कराया। इसके बाद घर के आंगन में सजे ‘मड़वा’ के नीचे वह अविश्वसनीय रस्म निभाई गई। रस्म की शुरुआत कुल देवी-देवताओं के आह्वान और काले बकरे की बलि के साथ हुई। बताया जा रहा है कि पूजा-पाठ के बाद दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया पर कथित रूप से देवता सवार हुए।

इसी ‘देव-आवेश’ की स्थिति में उन्होंने जलते हुए चूल्हे से सुर्ख लाल अंगार बाहर निकाले और उन्हें मड़वा के बीचों-बीच बिखेर दिया। इसके तुरंत बाद पिता स्वयं उन धधकते अंगारों पर बेखौफ होकर नाचने लगे। पिता के इस नृत्य ने वहाँ मौजूद ग्रामीणों की सांसें थाम दीं। इसके पश्चात, शादी के जोड़ों में सजे-धजे दूल्हा जयप्रकाश और दुल्हन पुष्पा ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया। ढोल-नगाड़ों की कानफोड़ू गूँज के बीच, इस नवदंपती ने नंगे पैर उन्हीं दहकते अंगारों के ऊपर अपने कदम बढ़ाए और सात फेरे पूरे किए।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ताज्जुब की बात यह रही कि इतनी भीषण आंच और सुलगते अंगारों के बावजूद नवदंपत्ति के पैरों में जलने का एक निशान तक नहीं मिला। परंपरा की मर्यादा का आलम यह था कि बहू के आगमन तक पूरे कुनबे ने रविवार रात से ही निर्जला उपवास रखा था। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिलासपुर गांव में गंधेल गोत्र के मात्र दो ही परिवार रहते हैं और यह विशेष रीत इन्हीं तक सीमित है। परिवार की मान्यता है कि इस ‘अग्नि-पथ’ को पार करने से नवदंपती को जीवन की हर कठिनाई से लड़ने का सामर्थ्य मिलता है।

दूल्हा-दुल्हन को गोद में उठाकर घर भीतर ले जाते हुए परिजन
रसम के पहले बकरे की बली दी गई

रस्म की पूर्णता के बाद गांव के प्राचीन शिव मंदिर में महादेव का आशीर्वाद लिया गया, जिसके बाद ही वैवाहिक कार्यक्रम का समापन हुआ। फिलहाल, आस्था और परंपरा के इस मेल के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा बटोर रहे हैं।

धधकते अंगारों पर चलते हुए दूल्हा-दुल्हन
कथित देव आवेश में मड़वा के नीचे नृत्य करते हुए दूल्हे का पिता

इस खबर को शेयर करें:

8690517c9326392a68531b5faf7668b00e00b86685972a50e34c21832c7c1c6c?s=90&d=mm&r=g

Editorial

News Room

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ से 1988 से निरंतर प्रकाशित दैनिक समाचार पत्र 'केलो प्रवाह' का यह Official Digital News Room है। हमारी संपादकीय टीम देश और छत्तीसगढ़ की प्रमुख खबरों, सीएम की गतिविधियों और शासन की जनहितैषी योजनाओं को प्रमुखता से साझा करती है। किसानों के हित में समर्पित हमारी टीम, 'जल, जंगल और जमीन' से जुड़े संवेदनशील मुद्दों और विभिन्न विभागों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाली रिपोर्टिंग के साथ ही सुदूर अंचलों की ज़मीनी हकीकत को सामने लाती है। जनहित से जुड़ी गतिविधियों, खनिज और औद्योगिक क्षेत्रों की 'Exclusive' खबरों को Evidence के साथ प्रमाणिकता से प्रकाशित करना हमारी प्राथमिकता है। राजनीति, प्रशासन, अपराध, स्पोर्ट्स, रोज़गार, खेती-किसानी और धार्मिक विषयों सहित हर क्षेत्र की खबरों को पूरी शुचिता के साथ प्रस्तुत करना ही हमारा संकल्प है।

Share: