रायगढ़। जिला मुख्यालय से महज 18 किलोमीटर की दूरी पर बसे भूपदेवपुर थाना क्षेत्र के गांव बिलासपुर में हाल ही में शादी की एक ऐसी रीत निभाई गई, जिसने विज्ञान और आधुनिकता के दावों को पीछे छोड़ दिया। यहाँ राठिया परिवार की नई बहू का स्वागत फूलों से नहीं, बल्कि धधकते हुए लाल अंगारों से किया गया। इस रस्म में पत्नी का साथ पति ने भी दिया और दोनों ने मिलकर नंगे पैर अंगारों पर सात फेरे पूरे किए। भीषण गर्मी की तपिश और सुलगती आग के बीच संपन्न हुई इस रस्म को जिसने भी देखा, वह दंग रह गया। आइए जानते हैं इस अनोखी शादी और अनोखी रीति-रिवाज के बारे में..
मिली जानकारी के अनुसार, भूपदेवपुर के ग्राम बिलासपुर निवासी जयप्रकाश राठिया की बारात जब बाड़ादरहा गांव से दुल्हन पुष्पा को विदा कराकर वापस लौटी, तो रीति-रिवाज के अनुसार परिवार के सदस्यों ने दूल्हा और दुल्हन को अपनी गोदी में उठा लिया। परिजनों ने नवदंपती को गोद में उठाकर ही आंगन के भीतर प्रवेश कराया। इसके बाद घर के आंगन में सजे ‘मड़वा’ के नीचे वह अविश्वसनीय रस्म निभाई गई। रस्म की शुरुआत कुल देवी-देवताओं के आह्वान और काले बकरे की बलि के साथ हुई। बताया जा रहा है कि पूजा-पाठ के बाद दूल्हे के पिता मेहत्तर राठिया पर कथित रूप से देवता सवार हुए।
इसी ‘देव-आवेश’ की स्थिति में उन्होंने जलते हुए चूल्हे से सुर्ख लाल अंगार बाहर निकाले और उन्हें मड़वा के बीचों-बीच बिखेर दिया। इसके तुरंत बाद पिता स्वयं उन धधकते अंगारों पर बेखौफ होकर नाचने लगे। पिता के इस नृत्य ने वहाँ मौजूद ग्रामीणों की सांसें थाम दीं। इसके पश्चात, शादी के जोड़ों में सजे-धजे दूल्हा जयप्रकाश और दुल्हन पुष्पा ने एक-दूसरे का हाथ थाम लिया। ढोल-नगाड़ों की कानफोड़ू गूँज के बीच, इस नवदंपती ने नंगे पैर उन्हीं दहकते अंगारों के ऊपर अपने कदम बढ़ाए और सात फेरे पूरे किए।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ताज्जुब की बात यह रही कि इतनी भीषण आंच और सुलगते अंगारों के बावजूद नवदंपत्ति के पैरों में जलने का एक निशान तक नहीं मिला। परंपरा की मर्यादा का आलम यह था कि बहू के आगमन तक पूरे कुनबे ने रविवार रात से ही निर्जला उपवास रखा था। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिलासपुर गांव में गंधेल गोत्र के मात्र दो ही परिवार रहते हैं और यह विशेष रीत इन्हीं तक सीमित है। परिवार की मान्यता है कि इस ‘अग्नि-पथ’ को पार करने से नवदंपती को जीवन की हर कठिनाई से लड़ने का सामर्थ्य मिलता है।
रस्म की पूर्णता के बाद गांव के प्राचीन शिव मंदिर में महादेव का आशीर्वाद लिया गया, जिसके बाद ही वैवाहिक कार्यक्रम का समापन हुआ। फिलहाल, आस्था और परंपरा के इस मेल के वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर चर्चा बटोर रहे हैं।























