भारत में चावल की कई किस्में उगाई जाती हैं, लेकिन एक ऐसी प्रजाति है जो अपने स्वाद और खुशबू के कारण पूरी दुनिया में मशहूर हो रही है – चिन्नौर चावल। मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में उगाई जाने वाली यह खास किस्म बासमती को भी टक्कर दे रही है। इसकी बढ़ती मांग ने किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ा दी है।
दुनियाभर में मशहूर चावल की किस्म
चिन्नौर चावल को ‘मध्यप्रदेश का बासमती’ कहा जाता है। इसकी खासियत है कि कच्चे दानों में भी हल्की सी सुगंध रहती है, जो पकने के बाद और बढ़ जाती है। इसका स्वाद हल्का मीठा और बेहद लजीज होता है, यही वजह है कि घरेलू उपभोक्ताओं से लेकर विदेशी बाजार तक, हर जगह इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है।
खेती कैसे होती है ?
चिन्नौर चावल की खेती के लिए उपजाऊ और पानी रोकने की क्षमता वाली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है। बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई कर गोबर की खाद डाली जाती है। इसकी नर्सरी तैयार कर पौध को सात दिन बाद रोपाई के लिए खेत में लगाया जाता है। करीब 160 दिन में फसल पककर तैयार हो जाती है। खेती के दौरान रासायनिक कीटनाशकों की जगह जैविक उपायों का उपयोग किया जाता है, जिससे चावल की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
कितनी हो सकती है कमाई?
चिन्नौर चावल किसानों के लिए सोने की खान साबित हो रहा है।
- एक एकड़ में 8 से 12 क्विंटल तक उत्पादन मिलता है।
- बाजार में इसकी कीमत 90 से 100 रुपये किलो तक रहती है।
- यानी एक सीजन में किसान लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं।
क्यों बढ़ रही है डिमांड?
बासमती की तरह लंबे दानों के बजाय चिन्नौर छोटे और सुगंधित होते हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह खासियत बेहद पसंद की जाती है। रेस्टोरेंट और होटल इंडस्ट्री में भी चिन्नौर चावल की भारी डिमांड रहती है।
बहरहाल चिन्नौर चावल स्वाद, सुगंध और स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतरीन विकल्प है। इसकी खेती से किसान न सिर्फ अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं बल्कि देश के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी पहचान बना रहे हैं।























