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गर्मी में कमाई के हिसाब से सुपरहिट है ये फसलें, 3 महीने में बन जाएंगे लखपति

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गर्मी का सीजन शुरू हो चुका है। ऐसे में किसान भाई खेती की उन्‍नत किस्‍मों पर फोकस करें तो ताबड़तोड़ कमाई कर सकते हैं। गर्मी के मौसम में किसान जायद फसलों पर काम करते हैं, जो आपको कम समय में बंपर मुनाफा दे सकती है ।इनमें मूंग, अरहर और चना प्रमुख हैं। ये ऐसी फसलें हैं जो आपको करीब तीन महीनों में लखपति बना सकती है। आमतौर पर अरहर की खेती सर्दियों के मौसम में की जाती है, लेकिन कृषि की उन्‍नत तकनीकों की मदद से अब किसान भाई इसकी खेती गर्म मौसम में करके भी मालामाल हो सकते हैं। आइए जानते हैं कैसे।

मूंग की खेती

मूंग की बाजार में काफी डिमांड है। इसमें मौजूद सेहतमंद तत्‍वों और गुणों की वजह से किसान इसकी खेती करते हैं। ये करीब 90 दिनों मे आपको बंपर मुनाफा भी करवाती है। इसे कैश क्रॉप के रूप में जाना जाता है। इसकी फसल दो बार जायद और खरीफ में ली जा सकती है। जायद के मूंग की बुआई के लिए अभी उपयुक्त समय है। अप्रैल के पहले सप्ताह में भी इसकी बुआई की जा सकती है। वहीं, खरीफ के दौरान मूंग की बुआई करने के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। मूंग के लिए गहरी, जल निकास युक्त दोमट या हल्की मिट्‌टी अधिक उपयुक्त रहती है। भूमि क्षारीय नहीं होनी चाहिए। मूंग के लिए खेत बारिश होने के एक-दो दिन बाद जरूरत के हिसाब से जोतकर तैयार कर लें। नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कृषि विभाग की डीन डॉ. गीता ए भवानी का कहना है कि मूंग की फसल कम समय में लागत से कहीं अधिक मुनाफा किसान भाइयों को दे सकती है। ऐसे में खेती के दौरान किसानों को थोड़ी बातों का ध्‍यान रखना होगा।

मूंग की किस्‍में

सत्या (एम.एच. 2-15)-चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार की ओर से तैयार यह किस्म देश के उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए जारी की गई। यह किस्म 67 से 72 दिनों में तैयार होती है। इससे 11 से 12 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उपज होती है।
के. 851- खरीफ और जायद दोनों के लिए उपयुक्त यह किस्म 60 से 80 दिन में पककर तैयार होती है। इसका दाना मोटा और चमकदार होता है।
आईपीएम02-3- यह भारतीय दलहन शोध संस्थान, कानपुर की ओर से तैयार की गई है। उत्तर पश्चिमी मैदानी क्षेत्रों के लिए जारी की गई है। यह 70-72 दिनों में पककर तैयार होती है। इसमें 11 से 12 क्विंटल प्रति हैक्टेयर की उपज हो सकती है।

अरहर की खेती

इस सीजन की दूसरी फसल अरहर है। इसकी खेती से किसान अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। प्रोटीन युक्त होने के कारण इस दाल की काफी डिमांड है।इसके कारण घरेलू बाज़ार के साथ-साथ विदेशी बाज़ारों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। भारत विश्व में सबसे ज्यादा अरहर का उत्पादन करने वाला देश हैं। भारत में महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक एवं आंध्र प्रदेश प्रमुख रुप से अरहर उत्पादन करने वाले राज्य हैं।

अरहर की उन्‍नत किस्‍में

RVICPH 2671- ये पहली सीएमएस आधारित भूरी अरहर की शंकर किस्म है। इसकी फसल अवधि 164 से 184 दिनों के बीच है। इस किस्म की दाल में प्रोटीन की मात्रा 24.7 % होती है, इसकी औसत उपज 22 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।
पूसा 9- इस किस्म की अवधि 260 से 270 दिनों की होती हैं, जिसकी बुआई अप्रैल से जुलाई तक की जाती है। इसकी औसत उपज 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है।

चने की खेती

अगली फसल हम आपको चने की बताने जा रहे हैं। जिसका देश भर में बड़े पैमाने पर उत्‍पादन होता है। संरक्षित नमी वाले शुष्क क्षेत्रों में इसकी खेती बेहद उपयुक्त मानी जाती है। ध्यान रखें इसकी खेती ऐसे स्थानों पर करें जहां 60 से 90 सेमी बारिश होती है।आर. एस. जी. 888- यह औसतन 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन देता है। यह किस्म तकरीबन 141 दिनों के अंदर पक कर तैयार हो जाती है।जी.एन. जी. 1969 (त्रिवेणी)- इसके दाने का रंग मटमैला सफेद क्रीम रंग का होता है। यह फसल 146 दिन में यह पककर तैयार हो जाती है।

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