गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा थाना क्षेत्र में प्यार के सप्ताह ‘वेलेंटाइन वीक’ के बीच एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक प्रेमी जोड़े ने शादी में हो रही कानूनी अड़चन और सामाजिक बदनामी के डर से आत्मघाती कदम उठा लिया। 11 फरवरी की रात पनकोटा गांव में पहले 20 वर्षीय अनिता सिंह ने फंदे पर झूलकर अपनी जीवनलीला समाप्त की, जिसके सदमे में उसके 18 वर्षीय प्रेमी कृष्णा सिंह ने भी पास के पेड़ से लटककर जान दे दी।
शादी की दहलीज पर खड़ा था जोड़ा, पर कानून बन गया दीवार
करीब दो साल पहले एक पारिवारिक समारोह में शुरू हुई अनिता और कृष्णा की प्रेम कहानी का अंत इतना खौफनाक होगा, किसी ने नहीं सोचा था। दोनों के परिजन इस रिश्ते के लिए राजी थे और उन्होंने सरकारी सामूहिक विवाह योजना के तहत आवेदन भी किया था। लेकिन कानून के आगे उनकी मंशा धरी की धरी रह गई। लड़के की उम्र महज 18 साल होने के कारण आवेदन निरस्त हो गया, क्योंकि शादी के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 वर्ष अनिवार्य है।
‘दोनों तरफ से बदनाम हो गई मैं’— वह आखिरी दर्द
परिजनों की सहमति मिलने के बाद दोनों पिछले तीन महीनों से गांव में एक अलग मकान लेकर साथ रह रहे थे। हालांकि, शादी में होने वाली देरी लड़की को मानसिक रूप से परेशान कर रही थी। अनिता को डर था कि लिव-इन में रहने के कारण समाज में उसकी और उसके परिवार की बदनामी हो रही है। परिजनों ने उन्हें तीन साल इंतजार करने की सलाह दी थी ताकि लड़का बालिग (शादी योग्य उम्र) हो सके, लेकिन बदनामी का यह बोझ अनिता सहन नहीं कर पाई।
प्रेमिका को मृत देख प्रेमी ने भी तोड़ा दम
घटना की रात जब अनिता ने घर के भीतर साड़ी का फंदा बनाया, तो कृष्णा ने उसे बचाने की आखिरी कोशिश की। उसने अनिता को फंदे से नीचे भी उतारा, उसे पानी पिलाने और होश में लाने की कोशिश की लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं। प्रेमिका की मौत के गम में पागल कृष्णा घर से भागकर पास ही स्थित नीलगिरी के बाग में पहुंचा और 15 फीट ऊंचे पेड़ पर चढ़कर मौत को गले लगा लिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों शवों का पंचनामा किया और मामले को जांच में लिया है।
यह घटना समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी ‘लिव-इन’ जैसे रिश्तों को लेकर सामाजिक दृष्टिकोण कड़ा है, जिससे युवाओं पर मानसिक दबाव बढ़ता है। साथ ही, कानूनी प्रावधानों और सामाजिक लोक-लाज के बीच तालमेल न बैठ पाने के कारण युवा इस तरह के आत्मघाती कदम उठा रहे हैं। यह घटना चीख-चीख कर कह रही है कि परिवारों को अपने बच्चों के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद करने की सख्त जरूरत है।

























