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केलो नदी के उद्गम स्थल को पर्यटन के रूप में किया जाएगा विकसित

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  • कलेक्टर ने पहाड़ लुड़ेग का किया निरीक्षण, उद्गम स्थल के संरक्षण और विकास पर ग्रामीणों से की चर्चा
  • खम्हार पाकुट जलाशय के तटीय क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश

रायगढ़, 13 मार्च 2026। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने लैलूंगा विकासखंड अंतर्गत केलो नदी के उद्गम स्थल पहाड़ लुड़ेग तथा खम्हार पाकुट जलाशय का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन संभावनाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। ग्राम पहाड़ लुड़ेग में केलो नदी के उद्गम स्थल के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने स्थानीय ग्रामीणों से चर्चा कर नदी के इतिहास और उद्गम स्थल से जुड़ी जानकारी ली। उन्होंने कहा कि यह स्थल प्राकृतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे सुरक्षित और संरक्षित रखने के साथ-साथ पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।

ग्रामीणों की मांग पर कलेक्टर ने लैलूंगा से पहाड़ लुड़ेग तक सड़क निर्माण की आवश्यकता पर भी विचार करने का आश्वासन दिया। साथ ही ग्राम पंचायत पहाड़ लुड़ेग को आदर्श ग्राम के रूप में विकसित करने के संबंध में भी सकारात्मक पहल का भरोसा दिलाया। कलेक्टर ने ग्रामीणों से अपेक्षा की कि केलो नदी के उद्गम स्थल को सुरक्षित और संरक्षित बनाए रखने में वे सक्रिय भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि गांव के समग्र विकास और उद्गम स्थल के संरक्षण के लिए ग्रामीण अपने सुझाव 15 दिनों के भीतर प्रशासन को उपलब्ध कराएं, ताकि उन्हें आगामी योजनाओं में शामिल किया जा सके।

खम्हार पाकुट जलाशय में मत्स्य पालन कार्य की सराहना
कलेक्टर ने ग्राम पंचायत जाम बहार स्थित खम्हार पाकुट जलाशय योजना का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने जल संसाधन संभाग धरमजयगढ़ के कार्यपालन अभियंता तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों से निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान खम्हार पाकुट जलाशय में आदिवासी मत्स्य समिति लैलूंगा द्वारा किए जा रहे मछली पालन कार्य की सराहना करते हुए उत्पादन को और बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने खम्हार पाकुट जलाशय के तटीय क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने के लिए सौंदर्यीकरण की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। इसके लिए किसी आर्किटेक्ट के माध्यम से विस्तृत ब्लूप्रिंट तैयार कराने हेतु जल संसाधन संभाग धरमजयगढ़ के कार्यपालन अभियंता को निर्देशित किया गया, ताकि भविष्य में इस क्षेत्र को आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा सके।

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