- क्या दूसरी जमीन पर हुई प्लॉटिंग, बोईरदादर में मिली थी अनुमति
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। बोईरदादर क्षेत्र में बनी रिहायशी कॉलोनियां कई राज समेटे हुए हैं। जमीनों की लोकेशन को लेकर भी स्पष्टता नहीं है। ऐसी ही एक कॉलोनी आशियाना एस्टेट्स की सांई वाटिका भी है। जिस भूमि पर प्लॉटिंग की अनुमति ली गई थी, वह तो अब भी कृषि भूमि है। तो फिर कॉलोनी किस जमीन पर बन गई। आशियाना एस्टेट्स के मालिक अनिल गोयल हैं। उन्होंने बोईरदादर के खसरा नंबर 57/65/3 रकबा 0.401 हे. में सांई वाटिका कॉलोनी स्थापना की अनुमति ली। 20 नवंबर 2015 को टाउन एंड कंट्री प्लानिंग ने विकास अनुज्ञा दी थी।
उक्त खसरा नंबर पर 24 प्लॉट काटकर बेचे गए। लेआउट भी एप्रुव हो गया। मतलब उस जमीन पर कॉलोनी तैयार हो जानी थी। अब राजस्व अभिलेख देखने पर पता चल रहा है कि भूमि तो अब भी मौजूद है। खसरा नंबर 57/65/3 का रकबा अब 0.365 हे. है। इसके मालिक गोबिंदा नोनियां पिता प्रसादी नोनियां हैं। मतलब रकबा भी कम हो गया। तो फिर सवाल यह है कि कॉलोनी कहां स्थापित हुई।
अवैध कॉलोनियों को बसाने वाले पटवारी
बोईरदादर में कई अवैध कॉलोनियां भी हैं, जहां प्लॉट काटकर बेचने की अनुमति नहीं थी। बिना किसी विकास अनुज्ञा के कुछ पटवारियों धड़ाधड़ बिक्री नकल दिए। अब ये कॉलोनियां नगर निगम से सुविधाएं मांग रही हैं। जो काम बिल्डर या भूमि स्वामी को करना था, वह निगम को करना पड़ रहा है। न तो सडक़ बनाई गई और न ही नाली। मकान तेजी से बनते जा रहे हैं।






















