रायगढ़, प्रो. अम्बिका वर्मा: “एस. पी. दिव्यांग कुमार का आई. पी. एस. सफर खासा रोचक रहा है। गुजराती भाषा में शिक्षा के बाद आपने अंग्रेजी मीडियम में बडौदा से एम. बी. बी. एस. किया, लेकिन लक्ष्य था यूपीएससी, इसलिए गुजराती मीडियम से ही अपने पहले एटेम्ट में यूपीएससी क्लियर किया। युवा प्रतिभागी अच्छी तरह जानते हैं कि प्रादेशिक भाषा में चयन अपेक्षाकृत सरल नहीं होता है, लेकिन दिव्यांग कुमार ने इस मिथ को तोड़ा। अपनी मोस्ट कॅम्फर्टेबल गुजराती भाषा में उसे क्लियर किया और वह भी पहले प्रयास में।” आईपीएस की प्रशासनिक यात्रा का उनका पहला पड़ाव, प्रशिक्षु एस. डी. ओ. पी. कोरबा, कोटा, रायपुर रहा और फिर बीजापुर में पुलिस अधीक्षक का दायित्व वहन किया। पश्चात् बेमेतरा, महासमुंद, कोण्डागांव, कांकेर, के बाद एस. पी. रायगढ़। छत्तीसगढ़ के सबसे चुनौती भरे जिले में ढाई साल के सफल कार्यकाल के बाद देश के पुलिस विभाग के ऑयकान ऑफि सर एस. पी. रूस्तम के रायगढ़ जिले में पुलिस अधीक्षक होने का गौरव प्राप्त हुआ।
संवेदना का एक खाकी रंग
जिले की खाकी वर्दी के चेहरे पर एक सादगी भरी लेकिन गर्वित मुस्कान एक प्रसंग था- एस. पी. दिव्यांग पटेल द्वारा अपने तीन वर्षीय बेटे निवांश के जन्म दिन पर, जीवनसंगिनी श्रीमती उर्चिता पटेल सहित रेल्वे स्टेशन के पास, कार्डिनल रोटी बैंक के साथ मिलकर जरूरतमंदों को भोजन कराना और फिर मिठाईयां भी खिलाना। वेदना का संवेदना में ढल जाना तो होता आया है, लेकिन निजी खुशियों के समय संवेदना को आमंत्रण सहित शामिल करना बड़ी बात है। इस पहल से बेहद खुश और तृप्त, अनेक कंठों ने नन्हें निवांश के जन्मदिन को अमोल आशीषों का दुर्लभ उपहार दिया था। एस. पी. दिव्यांग कुमार पटेल की यह पहल सामाजिक संवेदना की नई राहें प्रशस्त करती है। एस. पी. दिव्यांग कुमार मानते है कि पॉजिटिव थिकिंग-सकारात्मक सोच आपको हमेशा निराशा एवं निगेटिविटी के विरूद्व उम्मीदो के उजालों की ओर ले जाती है। सकारात्मक सोच बताती है कि जीवन में चुनौतियां तो लाजिम है, क्योंकि ये चुनौतियां ही आपको एक अतिरिक्त ऊर्जा और उम्मीदों के साथ मोटिवेट करती रहती हैं। इसी व्यावहारिक सोच के साथ एस. पी. दिव्यांग कुमार का जारी है, कामयाबी भरा पुलिस-संवेदना का खाकी सफर।
सीधे संवाद का प्रतिसाद
अपनी पोस्टिंग के तुरन्त बाद ही एस. पी. दिव्यांग कुमार अधीनस्थों की मीटिंग लेते रहे। अपने ऑफिस स्टाफ की हर एक शाखा की समीक्षा करते हुए यह मैसेज दिया कि ऑफिस आने वाले तथा वरिष्ठ कार्यालय से प्राप्त शिकायतकर्ताओं का समय सीमा में निराकरण सुनिश्चित हो। थानो के अपराध, मर्ग, गुम इंसान और अन्य शिकायतो के लिए गुणवत्तामूलक कार्य किये जायें। अन्य कार्य-निर्देशों के अलावा उन्होंने डायल-112 के स्टाफको रेस्पांस टाइम कम करने और ईआरवी का दुरूपयोग रोकने तथा प्रत्येक घटना की फोटो- वीडियो बनाकर ए. टी. आर. प्रोर्फामानुसार व्हॉट्सएप ग्रुप में प्रेषित करने के लिए निर्देशित किया। कुल मिलाकर संवेदनशील प्रशासन का एक क्लियर फ्रेमवर्क अब समस्त पुलिस अधिकारियों-कर्मियों के सामने था। रायगढ में सायबर फ्रॉड के बढ़ते घनत्व पर एस. पी. दिव्यांग कुमार साफगोई से कहते है कि कोई भी व्यक्ति, जो स्मार्ट फ ोन यूज करता हैं वह सायबर फ्राड का साफ्ट टारगेट या धोखाधड़ी का शिकार हो सकता है। देश के किसी भी कोने से, किसी को भी, कोई अपना टारगेट बना सकता है। इसके लिए अपेक्षित जागरूकता बेहद जरूरी हैं। इसलिए विभाग द्वारा गांव-गांव जाकर समझाईश दी जा रही है कि किसी से भी ओ. टी. पी. शेयर न करें।
हेलमेट पहनें ताकि निर्बाध चलता रहे जिंदगी का सफर
एस. पी. दिव्यांग कुमार कहते हैं कि वर्ल्डकप फायनल में उस दिन सूर्यकुमार ने बाउण्ड्री पर कैच नहीं पकड़ा था बल्कि वर्ल्ड कप की ट्रॉफी ही उनके दोनों हाथों में आ गई थी। सड़क दुर्घटना में हेलमेट की भूमिका सूर्यकुमार के इसी विजेता कैच की मानिन्द है जो मौत को परे धकेल कर जिन्दगी को, सांसों की निरंतर धड़कती ट्राफी प्रदान करता है। इस संदर्भ में उन्होंने दो पहिया वाहन चालकों के लिए, अपनी किस्म का एक खास और रोचक अभियान आरंभ किया। आउटर सड़कों पर होने वाली अधिकांश मौतें, दुपहिया वाहन चालक के हेलमेट नहीं पहनने के कारण हुई हैं। अपने इस विशेष अभियान में बिना हेलमेट वाहन चलाते ऐसे चालकों पर बाकायदा आर्थिक चालानी- कार्यवाही काटी गईं और फिर उन्हें ‘निःशुल्क हेलमेट प्रदान किया गया।’ इस हेलमेट वितरण कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री ओ. पी. चौधरी और कलेक्टर कार्तिकेया गोयल भी शामिल हुए। अपने संवेदनशील सम्बोधन में वित्त मंत्री ने कहा भी ‘अपनी खुद की और अपने परिवार एवं समाज तथा देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए हेलमेट जरूर पहने।’ इस अभियान की प्रशंसा करते हुए वित्त मंत्री का मैसेज था ‘पुलिस अधीक्षक रायगढ़ के नेतृत्व में, रायगढ़ पुलिस का पांच हजार हेलमेट वितरण का यह अभियान, समाज में सड़क-सुरक्षा का महत्वपूर्ण संदेश देता है। हेलमेट का उपयोग, व्यक्तिगत सहित एक सामाजिक जिम्मेदारी भी है। एस. पी. दिव्यांग कुमार के बेहद महत्वपूर्ण, जीवन रक्षक अभियान, हेलमेट वितरण में जिले के उद्योगो और सामाजिक संगठनो की सहभागिता प्रशंसनीय है।’
संदर्भ चुनौतियों का !
रायगढ़ जिले की चुनौतियों के संदर्भ में एस. पी. दिव्यांग कुमार मानते हैं कि जिले में कई चुनौतियां हैं। औद्योगिक- समृद्ध जिला होने के सबब से सड़क दुर्घटनाओं में मौतों के मामले, घनी बसाहट और कम चौड़ी सड़कों की वजह से ट्रैफि क नियंत्रण की चुनौतियां, हत्या प्रकरणों की अधिकता तथा उड़ीसा-बिहार की सीमाओं से जुड़ा जिला होने के कारण मादक द्रव्यों की तस्करी जैसी समस्याएं खास हैं, लेकिन पुलिस प्रशासन की चुस्ती और दक्षता और अपेक्षित संवेदनशीलता से समस्याओं में कमी आई हैं। एक जबरदस्त चुनौती भरे प्रकरण में महिला संबंधी कारित अपराध की छानबीन में आरोपी के जम्मू कश्मीर में होने की जानकारी मिली। यह भी पता चला कि वह एक अन्य अपराध प्रकरण में नाबालिग बच्ची के साथ रह रहा हैं। जम्मू की स्थानीय पुलिस के सहयोग से उसे हिरासत में लिया गया। विकट स्थिति यह थी कि वापसी में रेल- बस कोई भी सुविधा उस समय उपलब्ध नहीं थी। लगातार दिनों की निगरानी में तीन पुलिस कर्मियों द्वारा आरोपी के साथ, दिन रात जागते हुए अंततः सुरक्षित रायगढ़ लाया गया।
स्पंदित पुलिस संवेदना
प्रशासनिक दक्षता के प्रसंग में, पुलिस संवेदना की डिटेलिंग में एस. पी. दिव्यांग कुमार का कॉन्सेप्ट सरल और तरल हैं। विभाग को स्पष्ट निर्देश है कि कोई भी पीड़ित थाने पहुंचे तो यह सुनिश्चित हो कि उसे रिलीफमिले। कोई व्यक्ति जब अत्यधिक परेशान, व्यथित होता है तभी तो वह पुलिस के पास जाता हैं। इस उम्मीद के साथ कि अब उसके साथ न्याय होगा। उसकी उम्मीद के केन्द्र में ‘पुलिस’ नाम की संस्था होती है। इसलिये समस्त थाना प्रभारियों को उनके स्ट्रिक्ट निर्देश हैं कि किसी परेशान प्रार्थी को थाने से नाउम्मीदी न हो। उसकी समस्या का समय समुचित निराकरण हो। विभाग का ध्येय वाक्य ‘परित्राणाय साधुनाम’ अपनी पूरी गरिमा से दमकता रहे। बेसिक-पुलिसिंग की उनकी यह पहली और खास दस्तक थी।























