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आसमान से बरसी आफत : खरसिया के चपले में हनुमंत कथा के विशाल पंडाल पर टूटा आंधी-तूफान का कहर, मची अफरा-तफरी

Chaple हनुमंत कथा ka विशाल पंडाल टूटा

रायगढ़, 30 मई। रायगढ़ जिले के खरसिया से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां चपले (राबर्टसन) गांव में चल रही संगीतमय श्री हनुमंत कथा के दौरान कुदरत का भीषण रूप देखने को मिला। शनिवार को अचानक आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने पूरे कथा स्थल पर भारी तबाही मचा दी। हवाओं का रुख इतना खतरनाक था कि श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बनाया गया विशालकाय पंडाल ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। इस अचानक आई आफत के बाद आयोजन स्थल पर कुछ देर के लिए चीख-पुकार मच गई और लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

अचानक बदला मौसम और मिनटों में उजड़ गई व्यवस्था
दरअसल, चपले गांव में बीते 28 मई से भव्य हनुमंत कथा की शुरुआत हुई थी, जो आगामी 3 जून तक चलने वाली है। हर दिन की तरह शनिवार को भी आस-पास के कई गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे थे। माहौल पूरी तरह भक्तिमय था, लेकिन इसी बीच दोपहर बाद अचानक मौसम ने पलटी मारी। देखते ही देखते आसमान में काले घने बादल छा गए और धूल भरी तेज आंधी चलने लगी। तूफान की रफ्तार इतनी ज्यादा थी कि पंडाल के लोहे के पाइप और तिरपाल उसे बर्दाश्त नहीं कर पाए। महज कुछ ही मिनटों के भीतर पूरा का पूरा पंडाल जमीन पर आ गिरा।

श्रद्धालुओं ने भागकर बचाई जान, बड़ा हादसा टला
मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि जब हवाएं बेकाबू हुईं और बिजली कड़कने लगी, तो पंडाल के नीचे बैठे लोगों में हड़कंप मच गया। गनीमत यह रही कि पंडाल के पूरी तरह गिरने से पहले ही ज्यादातर लोग समझदारी दिखाते हुए खुले मैदान और पास के पक्के मकानों की तरफ भाग निकले। इसी वजह से एक बहुत बड़ा हादसा होने से टल गया। आंधी थमने के बाद आयोजन समिति के सदस्य, गांव के युवा और स्वयंसेवक तुरंत राहत काम में जुट गए। राहत की बात यह है कि इस पूरी तबाही में किसी भी श्रद्धालु को गंभीर चोट नहीं आई है और न ही किसी तरह की जनहानि की खबर है।

आर्थिक नुकसान बड़ा, पर हौसले अब भी बुलंद
इस प्राकृतिक आपदा की वजह से कथा स्थल पर सजाया गया भव्य मंच, साउंड सिस्टम, लाइटें और हजारों मीटर तिरपाल पूरी तरह बर्बाद हो गए हैं। पंडाल गिरने से आयोजन समिति को लाखों रुपये का आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है। हालांकि, इस बड़ी मुसीबत के बाद भी ग्रामीणों और आयोजकों की आस्था डिगी नहीं है। समिति के सदस्यों का कहना है कि हनुमंत कथा अपने तय समय तक यानी 3 जून तक ही चलेगी। इसके लिए गांव वाले मिलकर फिर से वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने में जुट गए हैं, ताकि आगे की कथा में श्रद्धालुओं को कोई परेशानी न हो।

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