- 2015 में राज्य सरकार ने दिया था आदेश, हैंडओवर ही नहीं लिया
रायगढ़, (केलो प्रवाह)। प्रदेश में निजी कॉलोनियों में ईडब्ल्यूएस की जमीन का मामला बहुत गंभीर है। इसका इस्तेमाल करने के लिए राज्य सरकार ने एक उपाय किया था। सभी जिलों से कहा गया था कि वे कॉलोनियों में आरक्षित 15 प्रश भूमि को हाउसिंग बोर्ड को अंतरित करें ताकि उस पर सस्ते आवास बन सकें। 2015 में इस आदेश पर अमल ही नहीं किया गया। भूतपूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के अनुमोदन से प्रमुख सचिव ने मार्च 2014 में आदेश दिया था कि निजी कॉलोनियों में गरीब वर्ग के लिए आरक्षित 15 प्रश जमीन का आधिपत्य हाउसिंग बोर्ड को दिया जाए। बोर्ड इन जमीनों पर सस्ते आवास बनाएगा ताकि गरीब वर्ग को पक्के मकान मिल सकें।
इस मामले में तत्कालीन आयुक्त छग गृह निर्माण मंडल सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने रायगढ़ कलेक्टर को पत्र लिखा था जिसमें ऐसी जमीनों का आवंटन करने को कहा गया था। दिलचस्प बात यह है कि इस आदेश पर अमल ही नहीं किया गया। बताया जा रहा है कि सांठगांठ करके बिल्डरों को लाभ पहुंचाया गया। जमीनों का आधिपत्य लेने के बजाय आदेश का पालन ही नहीं किया गया। कितनी जमीन हाउसिंग बोर्ड को आवंटित की गई थी, किसी को नहीं मालूम। आदेश के साथ ही कुछ निजी कॉलोनियों में बची हुई जमीन की जानकारी भी दी गई थी। कुछ कॉलोनियों में इस जमीन पर भी प्लॉट काटे जा चुके हैं। चूंकि भूमि का रिकॉर्ड भी दुरुस्त नहीं किया गया इसलिए जमीन बिल्डर के ही नाम पर रह गई।
इन कॉलोनियों में बची थी जमीन
आदेश के मुताबिक हाउसिंग बोर्ड को भूमि आवंटित की जानी थी। कुछ कॉलोनियों में ऐसा किया गया। जी. पटेल 3.927 एकड़, चिडि़पाल बिल्डर्स 0.938 एकड़, राधे बिल्डर्स 2.326 एकड़, आशियाना स्टेट प्रालि 1.6 एकड़, गुरुदेव बिल्डटेक 1.852 एकड़, एपेक्स रियल इन्फ्रास प्रालि. 0.3038 एकड़, बैजनाथ बिल्डर्स 0.4964 एकड़, सावित्री देवी 0.9707 एकड़, ओजोन बिल्डकॉन 0.728 एकड़, केशव डेवलपर्स 0.545 एकड़, लक्ष्य इंफ्रास्ट्रक्चर 1.422 एकड़, 0.733 एकड़, रजत ग्रेन्स एंड फूड्स प्रालि 0.40 एकड़, राजेश अग्रवाल 0.689 एकड़।






















