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Home | रायगढ़ में सरकारी जमीन की बंदरबांट: सरकारी जमीन बेचने वाले की फाईल तहसील ऑफिस में गुम, तहसीलदार मौन!

रायगढ़ में सरकारी जमीन की बंदरबांट: सरकारी जमीन बेचने वाले की फाईल तहसील ऑफिस में गुम, तहसीलदार मौन!

रायगढ़। प्रदेश में राजस्व विभाग के कार्यों और भूअर्जन घोटालों को लेकर कोई रैंकिंग बनेगी तो रायगढ़ जिला निस्संदेह टॉप तीन में शुमार होगा। जिले के हर तहसील में अलग-अलग तरह से भूमि घोटाले हो रहे हैं। राजस्व सुधार के लिए जरूरी है कि कोई विसंगति सामने आने पर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। लेकिन ऐसा होता दिख नहीं रहा है। कापू तहसील में सरकारी जमीन को बेचने और खरीदने वालों पर अब तक एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकी है। फाइल भी गुम हो गई है। जब राजस्व घोटालों और अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई बंद हो जाती है, तो गड़बडिय़ां बढ़ती जाती हैं। गड़बड़ी करने का मौका मिलते ही सरकारी जमीनें तक बेच दी जाती हैं। धरमजयगढ़ में शासकीय भूमि को तीन व्यक्तियों ने पटवारी के साथ मिलकर बेच दी।

शिकायत होने पर पता चला तो जांच हुई। कार्रवाई के लिए फाइल आगे बढ़ी तो इसे रोक दिया गया। धरमजयगढ़ में सरकारी जमीन को हथियाने के लिए जैसा तरीका अपनाया गया, वह आश्चर्यजनक है। ग्राम रायमेर की भूमि खनं 467/23 रकबा 0.248 हे., 467/25 रकबा 0.965 हे. और 467/36 रकबा 0.874 हे. शासकीय भूमि बड़े झाड़ के जंगल मद में दर्ज थी। वर्ष 1930 में मूल खसरा नंबर 467 रकबा में 89.46 हे. जंगल मद दर्ज था। बाद में इसके कई टुकड़े करके ग्रामवासियों को पट्टेदार के रूप में दर्ज किया गया। लेकिन उपरोक्त तीनों खसरों में किसी का नाम दर्ज नहीं था।

इस जमीन को पहले उजित राम पिता नान्ही राम के नाम पर दर्ज किया गया। उसकी ओर से आम मुख्त्यारनामा कैलाश कुमार जेठवानी पिता परशुराम जेठवानी निवासी धरमजयगढ़ के नाम किया गया। कैलाश ने यह जमीन मधुसूदन अग्रवाल पिता शंभूनारायण अग्रवाल निवासी पत्थलगांव को बेच दी। पटवारी राकेश साय ने विक्रय पत्र के साथ चतुर्सीमा, बी-वन खसरा और नक्शा दिया। इसकी शिकायत हुई तो प्रशासन में खलबली मच गई। आनन-फानन जांच करवाई गई। पता चला कि उजित राम किसी कैलाश जेठवानी को नहीं जानता। मतलब फर्जी तरीके से जमीन हथियाने के लिए ऐसा कुचक्र रचा गया।

हो चुके हैं एफआईआर के आदेश

जांच में पाया गया कि खनं 467/23 रकबा 0.248 हे., 467/25 रकबा 0.965 हे. और 467/36 रकबा 0.874 हे. भूमि शासकीय भूमि के रूप में दर्ज थी। यह किसी को भी आवंटित नहीं थी। इसीलिए रायमेर गांव के उजित राम का नाम पहले दर्ज कराया गया। इसके बाद जमीन की पावर ऑफ अटॉर्नी कैलाश जेठवानी के नाम दी गई। उसने पत्थलगांव के मधुसूदन अग्रवाल को जमीन बेची। जमीन पर गिरदावरी भी की गई है जिसमें धान की फसल का उल्लेख है। जांच करने के बाद पटवारी राकेश साय को सस्पेंड किया गया गया था। इसके अलावा राकेश साय, कैलाश जेठवानी और मधुसूदन अग्रवाल के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है, लेकिन कापू तहसीलदार ने अब तक कोई कार्रवाई नहीं की है।