रायगढ़ (केलो प्रवाह)। रविवार को व्यापमं परीक्षा के दौरान चांदमारी स्कूल में महिला परीक्षार्थी के हाथ में बंधे कलावा को काटने के मामले में परीक्षार्थी द्वारा थाने में की गई लिखित शिकायत पर पुलिस द्वारा महिला अधिकारी सहित अन्य के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध किये जाने के विरोध में अधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले अधिकारियों ने कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपते हुए परीक्षा ड्यूटी के दौरान अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे अधिकारी व कर्मचारियों के विरूद्ध की गई कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने एवं एफआईआर निरस्त करने की मांग की है।
रविवार को व्यापमं परीक्षा के दौरान चांदमारी स्कूल में महिला परीक्षार्थी केे हाथ में बंधे कलावा को काटने की बात को लेकर बजरंग दल एवं अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं द्वारा विरोध जताये जाने तथा परीक्षार्थी संभावी तिवारी द्वारा कोतवाली में लिखित शिकायत दर्ज कराने के मामले के बाद दबाव में आये प्रशासन ने महिला अधिकारी हेमलता साहू एवं अन्य पुरूष अधिकारी के विरूद्ध बीएनएस की धारा 299 के तहत अपराध पंजीबद्ध किये जाने के मामले में अब अधिकारियों ने मोर्चा खोल दिया है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी एवं अधिकारी फेडरेशन के बैनर तले शिक्षकों व अन्य अधिकारियों ने
जिला कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी एवं एसएसपी शशि मोहन सिंह को ज्ञापन सौंप कर कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने एवं एफआईआर निरस्त करने की मांग की है। फेडरेशन द्वारा दिये गये ज्ञापन में कहा गया है कि उक्त घटनाक्रम में हमारे द्वारा जानबूझकर किसी व्यक्ति को अपमानित करने अथवा किसी के प्रति दुर्भावनापूर्वक कार्रवाई करने का कोई उद्देश्य नहीं था। अनुशासन, गोपनीयता एवं सुरक्षा रखने की दृष्टि से उस समय उपलब्धि परिस्थितियों में सामान्य परीक्षा प्रक्रिया एवं हमें सौंपे गये दायित्वों को पालन किया गया। यदि उक्त प्रक्रिया के दौरान किसी व्यक्ति को असुविधा हुई अथवा किसी स्तर पर गलतफहमी उत्पन्न हुई हो, तो उसे तत्काल
अपराधिक मंशा के रूप में देखा जाना उचित नहीं है। वास्तविक घटनाक्रम, कर्मचारियों की भूमिका तथा उस समय लागू परीक्षा निर्देशों का निष्पक्ष परीक्षण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कार्रवाई के पूर्व परीक्षा केन्द्र पर कर्मचारियों को दी गई जिम्मेदारी, परीक्षा संचालन संबधित विभागीय निर्देश, अपराधिक मंशा का स्वतंत्र परीक्षण कराया जाना आवश्यक है। प्रक्रिया का पालन करते समय संभावित भूल, गलत फहमी अथवा परिस्थितिजन्य निर्णय को स्वत: अपराधिक मंशा नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सभी पक्षों को सुनकर निष्पक्ष निर्णय लिया जाए तथा एफआईआर को निरस्त किया जाए।























