- भारतीय खाद्य निगम और नागरिक आपूर्ति निगम में लक्ष्य पूरा नहीं, तीन महीने बाद धान खरीदी
रायगढ़,(केलो प्रवाह)। हर साल की यही कहानी हो गई है। पर्याप्त मिलिंग क्षमता होने के बावजूद छह महीने में भी चावल जमा नहीं हो पाता। वर्ष 25-26 का चावल जमा करने की अवधि 31 जुलाई को खत्म हो चुकी है। लेकिन एफसीआई में 25 प्रश और नान में 72 प्रश चावल ही जमा हो सका।
एक साल का चावल अगले साल के धान को कूटकर देने का चलन अब स्थाई हो गया है। वर्ष 25-26 में राइस मिलर्स को भारतीय खाद्य निगम और नागरिक आपूर्ति निगम में चावल जमा करने के लिए 31 जुलाई 2026 तक मोहलत दी गई थी। धान का उठाव दिसंबर 2025 से ही शुरू हो गया था।
तब मिलर्स को 24-25 का चावल जमा करना था। अब 25-26 का चावल बाकी रह गया। एफसीआई में 2,52,971 एमटी चावल जमा किया जाना था जिसमें से 59,400 एमटी चावल ही जमा हो सका है। इसी तरह नान में 1,28,843 एमटी चावल पहुंचना था जिसके एवज में 93,368 एमटी चावल ही जमा हो पाया। एफसीआई में करीब 24 प्रश और नान में 72 प्रश चावल जमा हो पाया है। नान में चावल जमा के मामले में रायगढ़ प्रदेश में तीसरे स्थान पर है। एफसीआई में हर साल की तरह लेटलतीफी हो रही है।
कन्वर्जन का इंतजार
अब राज्य शासन से चावल जमा करने के लिए अतिरिक्त मोहलत की मांग की जा रही है। हालांकि एफसीआई का टारगेट पूरा कर पाना मिलर्स के लिए बेहद मुश्किल होगा। धान खरीदी शुरू होने के साथ ही एफसीआई से नान में कन्वर्जन की मांग भी उठेगी। एफसीआई में गोदाम खाली नहीं होने और कई तकनीकी रुकावटों के कारण मिलर्स चावल जमा नहीं कर पाए।






















